Manishakumari
‘’अहम् ने यह वहम पाल रखा है कि
सारा कारवां हमने ही संभाल रखा है ‘’.

भाई ,इस एक शब्द ने हम सबको मशरूफ कर रखा है .हमने अपने अहम् को इतना सर चढ़ाया हुआ है कि हमें लगता है कि अगर हम ना हो तो इस दुनिया की गति धीमी हो जाएगी. आजकल टीवी पर एक विज्ञापन आता है Maaza का .उसमे दिखाया जाता है कि एक औरत को अपने कॉलेज के दोस्तों के साथ एक दिन और बिताना होता है .इसके लिए वो अपनी पति से पूछ रही होती है इसी पूछने के क्रम में वो बोलती है ‘’–मेरे बिना मैनेज हो जाएगा’’.जब मैंने पहली बार ये विज्ञापन देखा तो मुझे तो पहले हंसी आई ,फिर मेरे मन में एक विचार कौंधा कि हम सबको ये क्यों लगता है कि अगर हम किसी जगह नहीं होंगे तो वह जगह खाली या सूनी हो जाएगी . इसके पीछे हमारा अहम् भाव ही काम करता है .हम अपनी जिन्दगी को पूरी तरह नियंत्रण में रखना चाहते है . हमारा अहम् ये सोचता है कि हमने ही सब सम्भाल रखा है .चाहे वो हमारा घर हो ,बाहर हों ,परिवार हो बच्चे हो या नाते –रिश्तेदार हो; कुछ को तो यहाँ तक लगता है कि सारा देश उन्हाने ही सम्भाल रखा है .हमें लगता है कि हम से ही सब कुछ ’मैनेज’ हो रहा है.अगर हम नहीं होंगे तो सब उलट -पुलट हो जाएगा . जबकि सच्चाई ये है कि यह सिर्फ हमारा वहम होता है .
सच तो ये है कि 90 प्रतिशत लोगों को रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ेगा आपके होने या न होने से और मैं तो यहाँ तक कहती हूँ कि इस 90 में से भी 20% ऐसे होंगे जिनको आपकी अनुपस्थिति ही ज्यादा सुकून देगी .ये बातें कडवी जरुर है परन्तु अफ़सोस अंततः सच्चाई यही है .बाकि बचे 10%,इनको आपकी अनुपस्थिति से बहुत फर्क पड़ेगा ,इनके जीवन कि गति जरुर धीमी होगी लेकिन रुकेगी नहीं .क्योंकि ये जीवन किसी के लिए नही रुकता है .फिर क्यूँ आप और हम इतना अहम् पाले हुए है.इस अहम् कि वजह से ही छोटी छोटी बातें झगडे का रूप ले लेती है .हम अपने अभिमान को स्वाभिमान समझकर ,बेकार कि बातों में उलझकर जिन्दगी का एक बड़ा और खुबसूरत हिस्सा गँवा देते है .
अगर हम अपने अहम् को थोडा साइड रखकर जीवन के रास्ते पर चलें तो हमारी जिन्दगी से बहुत सारा तनाव दूर हो जाएगा क्योंकि हमारे तनाव के पीछे बहुत बड़ा हाथ इस अहम् का ही होता है
अफ़सोस ,हमें सहेजना था ‘स्वाभिमान ‘को परन्तु सहेजा क्या ‘अभिमान ‘को और यही वजह है कि आज दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध के दरवाजे पर खड़ी है .इस वैश्विक युद्ध के पीछे का सबसे बड़ा कारण’ ‘हम किसी से कम नही ‘’वाली भावना ही है .सबका अहम् सर चढ़कर बोल रहा है जिसका खामियाजा सारी दुनिया भुगत रही है .काशशश …………
‘’दर्द दिलों के कम हो जाते
मैं और तुम गर हम हो जाते’’.



