चुनाव के बीच ही काँग्रेस आर्थिक कमी से जूझ रहा हैं। चुनाव में लोगों को अपनी तरफ लाने के लिए और नेताओं को चुनावी खर्च का इंतजाम में भी पार्टी की जुटी हुई है। चुनाव के इस मौसम में कांग्रेस पार्टी आर्थिक तंगी से जूझ रही है। तंगी का आलम यह है कि चुनावी खर्च को भुनाने के लिए पार्टी नेताओं और मुख्यालय में हो रहे खर्च में काफी कटौती किया है।
फंड क्राइसिस से जूझ रही कांग्रेस पार्टी ने नेताओं द्वारा किए जा रहे फिजूलखर्ची पर लगाम लगाने का निर्देश दिया है। पार्टी मुख्यालय से जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि नेता खर्च अपनी समझदारी से करें। पार्टी में फंड की कमी का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पार्टी ने कैंटीन के खर्च में भी कटौती किया है। चुनाव के दौरान कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ पार्टी मुख्यालय में होती है। जिसके कारण भारी भरकम बिल बनता है। जिस पर लगाम लगाने के लिए पार्टी ने यह फैसला किया है। जारी निर्देश में कहा गया है कि महासचिव यदि सांसद हैं तो उन्हें ट्रैवल भत्ता नहीं दिया जाएगा। साथ ही साथ, जहाजों की तुलना में ट्रेन का सफर करने हेतु कहा गया है। बताया यह भी जा रहा है कि 1400 किलोमीटर से ज्यादा के सफर पर महीने में दो बार हवाई जहाज की टिकट पार्टी दे सकेगी। निर्देशों के मुताबिक यदि रेल का किराया फ्लाइट से ज्यादा हो तो सचिव फ्लाइट का टिकट ले सकते हैं।
दिल्ली पार्टी मुख्यालय के निर्णय के बाद पार्टी नेता अपने-अपने जेब टटोलने शुरू कर दिए। चुनावी मौसम में लिया गया फैसला नेताओं के पॉकेट पर असर डाल रहा है। पार्टी मुख्यालय से जारी निर्देशों में बताया गया है कि यह निर्देश पार्टी के महासचिव, प्रभारियों और फ्रंटल संगठन के प्रमुख के लिए है। यही नहीं कार्यालय खर्चों में भी कटौती का निर्णय लिया गया है। बताया जा रहा है कि कार्यालय खर्च जैसे बिजली, स्टेशनरी, न्यूज़ पेपर इत्यादि जैसे खर्चों पर भी पार्टी ने लगाम लगाया है। पार्टी ने राज्य प्रभारी और सचिव को दिल्ली मुख्यालय में कम समय देने का निर्देश दिया है। कहा गया है कि फील्ड में ज्यादा से ज्यादा समय देकर पार्टी को मजबूत करने का काम करें। साथ ही, यात्रा भ्रमण के दौरान कार्य करने के लिए कांग्रेस कार्यालय में जगह देने का भी निर्देश दिया गया है। मतलब स्पष्ट है कि चुनावी तैयारियों में जुटी कांग्रेस पार्टी पैसे की कमी से जूझ रही है। चुनावी खर्च को जुटाने के लिए पार्टी नेताओं पर किए गए खर्च में कटौती कर रही है। गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व पार्टी इसके पहले राज्य इकाइयों को एक करोड़ बूथ सहयोगी बनाने तथा सहयोगियों के माध्यम से फंड एकत्रित कराने का निर्देश भी दिया गया था।