कहते हैं कि सफेदपोश राजनीति में एक अदृश्य चमक होती है जो दिखाई तो नहीं देती लेकिन इसकी चकाचौंध के आगे बॉलीवुड का ग्लैमर भी फींका पड़ जाता है।

इतिहास गवाह है कि फिल्मी सितारों ने राजनीति की जमीन पर कदम रखा और वहां भी अपना स्टारडम साबित किया। दक्षिण भारत के फ़ैन्स का भगवान रजनीकांत और कमल हासन तथा फ़ैन्स को डराने वाला पर दिल का सच्चा कलाकार प्रकाश राज का इन दिनों राजनीति में आने की अटकलें लगाई जा रही हैं। ये कलाकार राजनीति में हाथ आज़माएंगे या नहीं, ये तो नहीं कहा जा सकता लेकिन उनसे पहले राजनीति में अपना कैरियर बनाने वाले कई अभिनेता और अभिनेत्रियाँ रहे हैं, जो सफल भी रहे हैं और असफल भी। भारत में शीर्ष राजनेताओं के फिल्मी कलाकारों से संबंध कभी अजूबा नहीं रहे। सबसे बड़ा मिसाल तो पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू के राज कपूर, दिलीप कुमार और देव आनंद के साथ मित्रवत संबंधों में देखी जा सकती है। लेकिन, उन दिनों हिंदी फिल्म जगत का कोई भी जाना माना कलाकार सक्रिय राजनीति में भागीदारी नहीं करता और न ही राजनेता अपनी जनसभाओं के लिए फिल्म कलाकारों को बुलाते थे। इसके विपरीत दक्षिण भारत में एमजी रामचंद्रन और एनटी रामाराव जैसे दिग्गज कलाकार थे जो न सिर्फ सक्रिय राजनीति में आए बल्कि सफल भी बने। फिल्म कलाकारों के राजनीति से जुड़ाव की शुरुआत अस्सी के दशक से मानी जाती है। इसकी पृष्ठभूमि में 1975 के आपातकाल की काफी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उस दौरान फिल्म उद्योग के एक तबके ने इसका जबर्दस्त विरोध किया था। देव आनंद और गायक अभिनेता किशोर कुमार इन फिल्म कलाकारों में सबसे आगे थे। आपातकाल के विरोध में उन्होंने बाकायदा जनता पार्टी का समर्थन भी किया। पर एक क्षेत्र में कामयाबी दूसरे क्षेत्र में सफलता की गारंटी नहीं, यही बात बॉलीवुड के अभिनेताओं पर भी लागू होती है, जो लोकप्रियता के बावजूद राजनीति में नाम नहीं कमा पाए। लेकिन लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व बढ़ रहा है।

हिंदुस्तान में साउथ के सुपर स्टारों का रुतबा बॉलीवुड के सितारों से कुछ अलग रहा है। वहां के कलाकारों के फैन उन्हें भगवान की तरह पूजते हैं। रजनीकांत ऐसे ही फिल्म सितारों की फेरहिस्त में टॉप पर हैं। जब उन्होने राजनीति में उतरने के संकेत दिए तो दक्षिण भारत की राजनीति में चहलकदमी तेज हो गई। रजनीकांत ने कहा कि ये सिस्टम सड़ चुका है और अब इसे बदलने की जरूरत हैं। साफ है कि सुपरस्टार रजनी राजनीति में उतरने का मन बना चुके हैं। अगर वो राजनीति में उतरते हैं तो साउथ कलाकारों में वे कोई पहला नाम नहीं होंगे। रजनीकांत से पहले भी साउथ के कई सुपरस्टार राजनीति में अपनी धाक जमा चुके हैं। दक्षिण भारत के बड़े राज्य तामिलनाडु में इस बार राजनीति नई करवट लेती नजर आ रही है। देश में भ्रष्टाचार, भाई भतीजावाद और गैर जिम्मेवार रवैया जैसी बुराईयों के कारण आम आदमी राजनीति के प्रति उदासीन रवैया अपना रहा है। ईमानदार, मेहनती, लोग हितैषी नेताओं को जनता भरपूर समर्थन देती है। जहां तक दक्षिणी राज्यों की बात है, यहां फिल्मी जगत से जुड़े राजनेताओं ने लोक भलाई की कई योजनाओं को शुरू किया, जिन्हें उत्तर भारत सहित पूरे देश में एक मॉडल के तौर पर अपनाया गया। दूसरी तरफ उत्तर भारत में राजनैतिक पार्टियों ने कलाकारों को बड़ी जिम्मेदारी देने की बजाय उन्हें चुनाव प्रचार तक ही सीमित रखा। चुनाव जीतने के बाद भी ये कलाकार पार्टी व राजनीति में अपना कोई प्रभाव नहीं छोड़ सके। इक्के-दुक्के कलाकार ही संसद या विधानसभा में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा सके हैं। अधिकतर फिल्मी राजनेता तो मूकदर्शक बनकर संसद की कार्रवाई देखते रहे। दक्षिण भारत की राजनैतिक पार्टियों ने कलाकारों को नेतृत्व करने का मौका दिया है।
कलाकार अपने स्वभाव से रचनात्मक होते हैं, यदि पार्टियां कलाकार को खुलकर काम करने का अवसर दें तो वह अवश्य समाज में कुछ बदलाव कर सकते हैं। ताजा हालातों के मद्देनजर तमिलनाडू में लोकसभा का चुनाव आकर्षण व रूचि का केंद्र बन सकता है।
अमिताभ बच्चन
बॉलीवुड के शहंशाह ने राजनीति में कदम रखा था लेकिन वो उनको रास नहीं आई। साल 1984 के लोकसभा के चुनावों में अमिताभ ने कांग्रेस के टिकट पर अपने गृह क्षेत्र इलाहाबाद से हेमवती नंदन बहुगुणा के खिलाफ चुनाव लड़ा। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद लोग इमरजेंसी के दर्द भूल चुके थे और इसका फ़ायदा अमिताभ को भी मिला। अमिताभ ने बड़ी जीत हासिल करते हुए अपने विरोधी को मात दी लेकिन उनके कदम राजनीति में ज्यादा दिन तक नहीं टिके। तीन साल बाद राजीव गांधी पर बोफोर्स सौदे में दलाली खाने का आरोप लगा और इस कांड में अमिताभ का भी नाम शमिल था। अमिताभ अपने उपर लगे आरोपों को बर्दाश्त नहीं कर पाए और इस्तीफा दे दिया।
जया प्रदा
तेलगू फ़िल्म ’अनथुलेनी कथा’ से अपने फ़िल्म सफर शुरू करने वाली जया प्रदा ने तब राजनीति में प्रवेश किया जब वो अपने कैरियर में बुलंदियों को छू चुकी थीं। पहली बार एन.टी रामा राव के बुलावे पर उन्होंने तेलगू देशम पार्टी के चुनाव प्रचार में हिस्सा लिया। टीडीपी ने अपने कोटे से जया को राज्य सभा भेजा। बाद में कुछ मतभेदों के चलते जया ने टीडीपी छोड़कर समाजवादी पार्टी ज्वाइन की और रामपुर से सांसद बनी। अपने राजनीतिक गुरु अमर सिंह के साथ मिलकर अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोक मंच बनाई जो बुरी तरह से असफल रही।
विनोद खन्ना
विनोद खन्ना फ़िल्मों में जितने सफल थे उतने ही सफल राजनीति में भी थे। भारतीय जनता पार्टी से गुरुदासपुर से लोकसभा पहुंचे व अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वे पर्यटन मंत्री बने।
शत्रुघ्न सिन्हा
शत्रुघ्न सिन्हा हिन्दी फ़िल्म इंडस्ट्री का जाना माना नाम है। आप लोकसभा पहुंच कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं।
हेमा मालिनी
बॉलीवुड की ड्रीमगर्ल हेमा मालिनी बीजेपी के लिए चुनाव प्रचारक व राज्य सभा सांसद रही हैं और वर्तमान में लोकसभा सांसद है। हेमा फ़िल्मों से लेकर राजनीति तक हर जगह हिट हैं।
स्मृती ईरानी
स्मृती ईरानी को आज भी ज्यादातर लोग छोटे पर्दे की तुलसी किरदार के रूप में ही जानते हैं। भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय सचिव के बाद आप कैबिनेट मंत्री भी बनी।
जयललिता
5 बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रह चुकी जे. जयललिता 60 के दशक की तमिल फ़िल्मों की सुपरहिट अभिनेत्री रही। जयललिता ने एम जी रामाचंद्रन के कहने पर एआईएडीएमके ज्वाइन की। जयललिता की भाषण कला का हर कोई दिवाना था।
एमजी रामाचंद्रन
साल 1953 तक एमजी रामाचंद्रन कांग्रेस के सदस्य थे, वो खादी पहनते थे। इसके बाद एमजीआर ने डीएमके ज्वाइन कर ली। कुछ सालों बाद मतभेदों के चलते एमजीआर ने नई पार्टी बना ली एडीएमके और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने। भारत रत्न एमजीआर के मध्यान भोजन योजना की तारीफ उनके विरोधी भी करते थे।
सुनील दत्त
1984 में कांग्रेस पार्टी ज्वाइन करने वाले सुनील दत्त सांसद और मंत्री रहे। अपने कार्यकाल के दौरान 1993 के मुंबई दंगों से आहत होकर उन्होंने रिजाइन कर दिया था। सुनील दत्त ने एक मकसद से राजनीति में कदम रखा था जिसके लिए वो हमेशा समर्पित रहे।
किरण खेर
फ़िल्मों में मां के रोल के लिए जानी जाने वाली किरण खेर भारतीय जनता पार्टी की सांसद रही है।
चिरंजीवी
तेलगू फ़िल्मों के सुपरस्टार चिरंजीवी ने प्रजा राज्यम पार्टी बनाई। तिरुपति से विधान सभा के सदस्य रहे और कांग्रेस ने चिरंजीवी को राज्य सभा भेजा और केन्द्रिय मंत्री का स्वतंत्र प्रभार भी दिया।
गोविंदा
सुपरस्टार गोविंदा कांग्रेस के टिकट से लोकसभा पहुंचे। गोविंदा फ़िल्म और राजनीति के बीच तारतम्य नहीं बिठा पाए और 2008 में एक्टिव राजनीति से दूर चले गए।
धर्मेंद्र
बॉलीवुड के हीमैन धर्मेंद्र बिकानेर राजस्थान से मेंबर ऑफ पार्लियामेंट चुने गए। इसके अलावा धर्मेद्र बीजेपी के इलेक्शन कैंपेन में भी नजर आते रहे।
वैजयंती माला
बीते जमाने की जानी मानी अभिनेत्री वैजयंती माला 1984 और 1989 में कांग्रेस के टिकट पर दक्षिण चेन्नई से चुनाव जीती थीं।
राजेश खन्ना
बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना ने समाजसेवा के लिए राजनीति में प्रवेश किया और सांसद बने।
राजबब्बर
राजबब्बर ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत समाजवादी पार्टी में शामिल होकर की और आगरा सीट से संसद सदस्य रहे। उन्होंने फिरोजाबाद से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीता।
