क्या हमारे नेताजी को शर्म भी आती है?

आज के परिवेश को देखकर मन सशंकित हो जाता है। लगातार बलात्कार,रोड पर धार्मिक पहचान पर हत्या की घटनाओं के बारे में सुनकर मन में डर की भावना पैदा हो जाती है। मेरे पास लिखने के लिए शब्द नहीं है जो इन दुराचारियों के लिए लिखा जाए। आखिर मानवता को शर्मसार करने वाले इन इन्सान रूपी दैत्यों को क्या कहा जाए?

देश के विभिन्न हिस्सों में हो रही बलात्कार की घटनाओं ने पूरे मानवजाति को शर्मिंदा किया है। इन घटनाओं को जानकर और इनके बारे में सुनकर मन द्रवित हो उठा है। मैं अपनी उन मित्रों और परिजनों को किस्मतवाला मानता हूँ जिन्हें बेटी का सुख है। एक बेटी के बगैर अपने परिवार को अधूरा समझता हूँ। परन्तु, आज के परिवेश को देखकर मन सशंकित हो जाता है। इन घटनाओं के बारे में सुनकर मन में डर की भावना पैदा हो जाती है। मेरे पास लिखने के लिए शब्द नहीं है जो इन दुराचारियों के लिए लिखा जाए। आखिर मानवता को शर्मसार करने वाले इन इन्सान रूपी दैत्यों को क्या कहा जाए? 4माह, 8माह, 8वर्ष, 11वर्ष की अबोध नासमझ मासूम सी परी के साथ यौन हिंसा? पटना से जानकारी आता नीट छात्रा के बलात्कार की जानकारी, क्या इससे भी घृणास्पद कुछ हो सकता है? कठुआ में आठ साल की बच्ची ‘आसिफा’ का बलात्कार, गुजरात के सूरत में ग्यारह साल की बच्ची का शव बरामद जिसके पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आठ दिन तक रेप की पुष्टि, उत्तर प्रदेश के उन्नाव में सत्रह वर्षीय बच्ची का बलात्कार, बाहुबली भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर बलात्कार का आरोप और फिर पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत ।इन शर्मसार करने वाली घटनाओं पर जिम्मेदार लोगों के गैर जिम्मेदाराना बयान। किसी ने कहा लड़कियों के छोटे कपड़ों की वजह से ऐसी घटनाएँ हो रही है, किसी ने कहा लड़कियों को रात में घरों से नहीं निकलना चाहिए, उत्तर प्रदेश के बरेली से भाजपा सांसद सतीश गंगवार ने कहा इतने बड़े देश में रेप की एक दो घटनाएँ हो जाए तो बात का बतगंड़ न बनाए। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं देश के पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह ने तो कहा था कि लड़को से गलती हो जाया करती है। हद हो गई, मानवता, इंसानियत, कहाँ खत्म हो गई? अफसोस होता है कि जिनके ऊपर देश को चलाने की जिम्मेवारी है वो इस तरह का शर्मनाक बयान दे रहे है। इन घटनाओं ने पूरे देश को झकझोड़ कर रख दिया। पूरे विश्व में इन घटनाओं की चर्चा हो रही है। इस तरह का गैर जिम्मेदाराना बयान देने वाले ये भूल जाते हैं कि इनके घर में भी बहन और बेटी है। ऐसे लोगों के लिए शायद बहन,बेटियों की अस्मिता का कोई महत्व नहीं है।

इन लोगों को कौन बताएँ कि चार माह, आठ माह, आठ वर्ष और ग्यारह वर्ष की बच्चियों को क्या पता कि उन्हें क्या पहनना चाहिए। अफसोस कि हमारे देश में इस पर भी राजनीति हो रही है। बेहद दुखद है कि इन घटनाओं को भी धर्म और समुदाय से जोड़कर देखा जा रहा है। बलात्कारी राजनेता को बचाने के लिए आंदोलन हो रहे हैं। एक ओर जहाँ इस भयानक घटनाओं की कल्पना से ही रोम रोम सिहर उठता है, वहीं कुछ लोग इसमें भी अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने में लगे हैं। वे लोग इन्सानियत को शर्मसार करने वाली इस घटना को भी धर्म और समुदाय से जोड़कर देख रहे है। हमारे देश के कई प्रसिद्व धर्म गुरू इस तरह के आरोप में जेल की सजा काट रहे हैं। आसाराम पर तो अपराध भी सिद्व हो गया और सजा भी हो गई। कई अन्य धर्म गुरूओं पर मामले अभी चल रहे है। हम जिनपर भरोसा करते है वही हमारा भरोसा तोड़ रहे है। सबसे दुखद बात ये है कि इन धर्म गुरूओं के पास अभिभावको ने ही अपनी बच्चियों को पहुँचाया। कई अभिभावकों ने तो इन बाबाओं पर इतना भरोसा किया कि उन्हें अपनी बच्ची की बात ही गलत लगी।पूरे देश में इन घटनाओं का विरोध हो रहा है। जिसने भी जाना वही थू थू कर रहा है। तो फिर ये वहशी दरिंदे आए कहाँ से? ये वहशी दरिंदे हैं कौन? निश्चित रूप से ये हमारे बीच के ही है हमारे ही समाज से कोई है जो इस तरह की शर्मनाक हरकत करता है। इन दरिंदों के लिए सख्त से सख्त कानून की माँग की जा रही है।लेकिन क्या हमारे देश की न्यायिक प्रक्रिया को देखते हुए ऐसा संभव है?आरोपी को पकड़ने में, आरोप साबित करने में और अंततः सजा देने का प्रावधान इतना लंबा है कि लोगों में कानून का डर समाप्त होता जा रहा है। हमारे देश में तो न्यायिक प्रक्रिया की ये स्थिति है कि यहाँ हत्यारों, घोटालेबाजों और अपराधियों को बचाने के लिए लंबी फौज खड़ी हो जाती है। सम्पन्न और ताकतवर लोग अपने रसूख का इस्तेमाल कर बच जाते रहे है। क्या ये बेहतर नहीं हो कि ऐसे लोगों का पारिवारिक और सामाजिक बहिष्कार किया जाए? मेरे ख्याल से ये सबसे बेहतर तरीका है ऐसे नीच वहशी दरिंदों के लिए।

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