गणतंत्र दिवस भारत पर्व में बिहार की झांकी,मखाना, लोकल से वैश्विक पहचान तक- रितेश सिन्हा

गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित भारत पर्व में बिहार की झांकी इस वर्ष विशेष आकर्षण का केंद्र होगी।


26 जनवरी से 31 जनवरी तक लाल किले परिसर में आयोजित इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की चयनित झांकियों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विरासत, परंपरागत ज्ञान, आजीविका और विकास यात्रा को जनता के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।

“एक भारत, श्रेष्ठ भारत”

भारत पर्व “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को सशक्त करते हुए राज्यों की विशिष्ट पहचान और सामाजिक-आर्थिक योगदान को राष्ट्रीय मंच प्रदान करता है। इसी क्रम में बिहार की झांकी राज्य के पारंपरिक कृषि उत्पाद मखाना को केंद्र में रखकर तैयार की गई है।

बिहार की झांकी

इस वर्ष बिहार की झांकी का विषय है— “मखाना: लोकल से वैश्विक थाली तक”। यह झांकी मिथिलांचल के तालाबों में उगने वाले मखाना की परंपरा, उससे जुड़े श्रम, महिला सहभागिता और वैश्विक बाजार तक पहुंच की पूरी यात्रा को प्रभावशाली ढंग से दर्शाती है।

मिथिला मखाना

मखाना, जिसे बिहार का सफेद सोना कहा जाता है, सदियों से मिथिला की संस्कृति, खानपान और धार्मिक परंपराओं का हिस्सा रहा है। आज वही मखाना पोषण से भरपूर आहार के रूप में विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। भारत विश्व के कुल मखाना उत्पादन में अग्रणी है, जिसमें बिहार की हिस्सेदारी लगभग 85 से 90 प्रतिशत मानी जाती है। वर्ष 2022 में मिथिला मखाना को भौगोलिक संकेत प्राप्त हुआ, जिससे इसकी विशिष्टता को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली।

झांकी की संरचना दो भागों में मखाना की पूरी कहानी कहती है। अग्र भाग में कमल के पत्तों के बीच उभरा सफेद मखाना, भौगोलिक संकेत का प्रतीक और मिथिला चित्रकला से सुसज्जित किनारे दर्शाए गए हैं। यह दृश्य मिथिला की सांस्कृतिक पहचान को रेखांकित करता है। झांकी के पिछले भाग में मखाना उत्पादन की पूरी प्रक्रिया को जीवंत रूप में दिखाया गया है। इसमें तालाबों से बीज संग्रह, कटाई, भुनाई, फोड़ाई, छंटाई, पैकिंग और गुणवत्ता जांच के दृश्य शामिल हैं। एक ओर मिट्टी के चूल्हे पर लोहे की कढ़ाही में मखाना भूनती महिला और दूसरी ओर लकड़ी के मूसल से मखाना फोड़ता पुरुष पारंपरिक श्रम, महिला सहभागिता और स्थानीय कौशल का सशक्त संदेश देते हैं।

मखाना किसानों के लिए बड़ी पहल

केंद्रीय बजट 2025–26 में बिहार के मखाना किसानों के लिए बड़ी पहल की गई है। राज्य में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की स्थापना की घोषणा के साथ लगभग 475 करोड़ रुपये के विकास पैकेज को स्वीकृति दी गई है। इसका उद्देश्य मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन को मजबूत कर किसानों की आय में स्थायी वृद्धि करना है।

पोषण की दृष्टि से मखाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह प्रोटीन, कैल्शियम और रेशा से भरपूर होता है तथा मधुमेह नियंत्रण, वजन संतुलन और हड्डियों की मजबूती में सहायक माना जाता है। कम वसा और कम ऊर्जा वाला यह आहार स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

भारत पर्व में बिहार की यह झांकी यह संदेश देती है कि परंपरागत ज्ञान और स्थानीय आजीविका आधुनिक व्यवस्था से जुड़कर वैश्विक पहचान बना सकती है। मखाना अब केवल तालाबों तक सीमित उत्पाद नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक और आर्थिक शक्ति का प्रतीक बनकर विश्व मंच की ओर अग्रसर है।

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