चाय से गायब होती मिठास और बेबस आम आदमी

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़, हरदा, मध्य प्रदेश सुबह की पहली चुस्की अगर फीकी लगने लगे तो समझ लीजिए कि महँगाई अब सिर्फ़ आंकड़ों और सरकारी दावों का हिस्सा नहीं रही, बल्कि आम इंसान की दिनचर्या में ज़हर घोलने लगी है। भारतीय समाज में चाय केवल एक पेय पदार्थ नहीं है, यह श्रमजीवियों की ऊर्जा, … Continue reading चाय से गायब होती मिठास और बेबस आम आदमी