जिंदगी एक सफर…चलना ही जिंदगी है

जिंदगी रास्तों से उतनी रोशन नहीं होती, जितनी पगडंडी से होती है. रास्ता दूसरों का होता है, जिस पर हम चलते हैं, जबकि पगडंडी पर हर कदम को अपने हिस्से की रोशनी तलाशनी होती है.

इस जीवन के अंदर आनंद की अभिलाषा हर एक व्यक्ति को है, चाहे वह किसी भी धर्म का हो, किसी भी रंग का होे। सबको बचपन से ही आनंद की अभिलाषा है। आनंद चाहिए, सुख-शांति चाहिए। आनंद मिल रहा है तो सब कुछ ठीक है। कोई मंदिर में नहीं जाता है, यह कहने के लिए, ‘‘हे भगवान! बहुत ज्यादा आनंद दे दिया, अब थोड़ा कम कर दो।’’ कोई नहीं जाता है, क्योंकि यह तुम्हारी प्रकृति है कि तुम्हारे लिए सुख सहने की कोई सीमा नहीं है और दुख जरा भी नहीं झेल सकते। किसी को सुनना कैसा होता है किसी को पढ़ना कैसा होता है. किसी के साथ होना कैसा होता है किसी के बिना कैसा होता है. किसी को सुनने में बहुत एकाग्रता लगती है. पूरे मनोयोग के साथ शब्दों को सुनने की जरूरत होती है. तब कहीं जाकर हम किसी को सही अर्थ में सुन पाते हैं. लेकिन असल जिंदगी में होता इसका उल्टा ही है. हम बस, इतना ही चाहते हैं कि खुद कुछ कहें, वह कहें, जिसके बारे में हम जानते हैं. हम बोलें और लोग सुनें. लेकिन हम सुनना नहीं चाहते. किसी को नहीं.

जिस गति से समाज में एक-दूसरे के प्रति असंवेदनशीलता बढ़ रही है, वह जल्द ही हमें एक हिंसक समाज की ओर धकेल रही है. हम सुन कम रहे हैं. हम पढ़ कम रहे हैं. देख कम रहे हैं. बस बोल रहे हैं. नाराज हो रहे हैं. एक-दूसरे के प्रति हिंसक हो रहे हैं. यह हिंसा विश्वास की कमी से हर दिन बढ़ रही है. लोगों से पूछिए कि वह ऐसे क्यों हो रहे हैं, भला. क्यों गाते-गाते लोग चिल्लाने लगे हैं, तो जवाब आऐगा, समय नहीं है. व्यस्तता के चक्र में उलझे हुए हैं.

जिसके पास समय है, वह ध्यान से सुनेगा. जो ध्यान से सुनेगा, उसके संबंध में ताजगी होगी. जीवन में प्रसन्नता होगी. जो सुन ही नहीं सकेगा, ठीक से उसका क्या! उसके पास क्या? उसकी दुनिया कैसी होगी. सहज समझा जा सकता है कि उसके जीवन में तनाव अधिक होगा. उसके भीतर जो घट रहा है, उसे कौन संभालेगा.

हमारे जीवन का सुकून, हमारे संबंधों की ताजगी व्हाट्सअप और कथित सोशल मीडिया ले उड़े हैं. इन्होंने हमारी सुनने, समझने की शक्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है. हम एक बात को सुनते हुऐ दूसरी पर दौड़ जाते हैं. और दूसरी बात को सुनते हुए तीसरी पर चले जाते हैं.

किसी को सुनने के लिए उतनी ही एकाग्रता और प्रेम चाहिए जैसे-जैसे हमारी एकाग्रता और प्रेम में कमी आऐगी, हमारी एक-दूसरे को सुनने, समझने की क्षमता कम होती जाऐगी.

इसलिए, आगे से जब किसी को सुनना हो. तो यह जरूर ध्यान रखें कि आप सुने सुन रहे हैं या नहीं.यह सारा संसार हमसे वायदा करता है कि ‘‘हमारी तरफ चलो। जैसा हम कहें, वैसे चलो और तुमको सुख मिलेगा।’’ कहाँ है असली सुख? ऐसा सुख कहाँ है, जो सारी जिंदगी भर बना रहे- क्योंकि यह जीवन भी एक यात्रा है और चल रही है। एक दिन यह चलना बंद हो जाएगी। लोग बड़े-बड़े प्लान बनाते हैं। पर क्या आपनें इस जीवन का भी कोई प्लान बनाया है? जब हम वर्तमान में जीते हैं, तो जीवन का तनाव काफी कम हो जाता है। सच तो यह है कि जो भी है, वर्तमान में है। कोई नहीं जानता कि कल कभी आऐगा या नहीं, इसलिए हम आने वाले कल की चिंता में समय क्यों लगाऐं। बजाय इसके कि हमारे पास जो है, उसका हम पूरा लुत्फ लें और अपने जीवन में खुशियां और प्यार भरें। यदि केवल वर्तमान है, तो गया वक्त भी नहीं है, अतीत नहीं है और इसलिए किसी से नाराज होने की वजह भी नहीं है। जब हम अपने शरीर से गुस्से को रिलीज कर देंगे, तो सच में इसका लाभ महसूस करेंगे। गुस्सा करने और किसी को क्षमा न करने की जिद पर अड़े रहकर हम खुद को शारीरिक और भावनात्मक रूप से दुर्बल बना रहे हैं। अपनी जिंदगी में सबसे स्वार्थी कोई काम कर सकते हैं, तो वह है क्षमा। क्षमा आजादी पाने के बराबर है। यदि हम नाराज हैं, तो हमें खुद से प्यार करना सीखने की जरूरत है। यदि कोई कल नहीं है, कोई भविष्य नहीं है, तो बिलों और पैसों को लेकर तनाव करने की कोई जरूरत नहीं है। इसके लिए चिंता करने की जरूरत नहीं है कि कल क्या होगा।

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