तेरी मेरी यारी, दो शब्दों में सिमटी पूरी दुनिया

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़, हरदा, मध्य प्रदेश ‘तेरी मेरी यारी’… यह महज़ दो शब्दों का एक जुमला नहीं, बल्कि ज़िंदगी का वह सबसे ख़ूबसूरत एहसास है जिसमें अनगिनत कहानियों की ख़ुशबू बसी होती है। यह उस बेफ़िक्र दौर का नाम है जहाँ ना कोई नफ़ा-नुकसान का हिसाब था और ना ही दिखावे का कोई … Continue reading तेरी मेरी यारी, दो शब्दों में सिमटी पूरी दुनिया