दिमागी नक्सल, वाद विवाद , जरूरत थी या नहीं ?, देश क्या चाहता है ?

‘दिमागी नक्सल’ शब्द का आना यह साफ संकेत देता है कि आने वाले दिनों में वैचारिक और राजनीतिक लड़ाई और उग्र होने वाली है। जहां सरकार इसे ‘सुरक्षा और राष्ट्रवाद’ के चश्मे से देख रही है, वहीं विपक्ष और आलोचक इसे ‘लोकतंत्र और असहमति की आवाज’ पर हमला मान रहे हैं। बहरहाल, 80वें स्वतंत्रता दिवस … Continue reading दिमागी नक्सल, वाद विवाद , जरूरत थी या नहीं ?, देश क्या चाहता है ?