धैर्य-एक सरल और सुगढ़ पथ

‘’धैर्य से बहुत से काम बनते हैं

अधैर्य से बिगड़ते हैं ‘’

यह कथन महात्मा गांधी का है और मुझे लगता है ये शब्द हम सबकी जिंदगी मे चरितार्थ होता है । जब हम जिंदगी के जद्दोजहद में होते हैं तो ये धैर्य ही होता है जो हमारा संबल बनता है ।

धैर्य का पहला अनुभव मुझे उस समय हुआ जब मेरा भाई दिशाहीन होकर भटकाव की स्थिति में आ गया था । मेरे पापा एक अध्यात्मिक प्रवृति के व्यक्ति हैं ,शायद इसलिए धैर्य का आशीर्वाद उन्हे मिला हुआ था । हम बहनें खीज भी जाती थी कि एक बेटा है और वो भी नालायक निकला । तब पापा एक स्निग्ध मुस्कान के साथ कहते –‘मैं निराश नहीं हूँ ,मुझे विश्वास है कि सब ठीक हो जाएगा’,और ’उनके धैर्य का ही परिणाम है कि आज मेरा भाई रेलवे के एक अच्छे पद पर है.

अगर हम धैर्य रख सकें और हमें हमारा उद्देश्य पता हो तो ये प्रकृति हमारा हर कदम पर साथ देती है.ये मेरा निजी अनुभव है कि धैर्य एक ऐसा सरल व सुगढ़ पथ है जिस पर चलकर हमारी जिंदगी में कठिनाईयां तो आती है लेकिन हम उस कठिनाई से बहुत सुकून-ए-अंदाज में निकल भी आते है

जिस तरह ‘’धैर्य से बहुत से काम बनते हैं’’ इसका उल्टा भी उतना ही सच है यानि ‘’अधैर्य से बहुत से काम बिगड़ते भी हैं’’. हम सबने बहुत बार ये अनुभव किया होगा जिस काम को हम अशांत मन यानि ‘’अधैर्यता’’ के साथ करने की कोशिश करते हैं वो काम बनने की जगह और बिगड़ जाता है जिसकी वजह से हमारा समय तो बर्बाद होता ही है साथ में हमारी उर्जा भी बिखर जाती है.

धैर्यवान होने का मतलब यह नहीं है कि हमारी प्रवृति शिथिल हो और कुछ प्रयास ना करके बस अच्छे समय का इंतजार करते रहे,क्योंकि बिना कर्म किये कुछ भी हासिल करने कि इच्छा मन की सुसुप्तावस्था  की पहचान है.

जब हम कोई काम ईमानदारी के साथ करते हैं तो हमारा मन स्वयं ही इसका अनुभव करता है और हमें एक शांति की अनुभूति होती है,लेकिन वही काम जब हम बेमन से या जैसे-तैसे पूरा कर देते हैं तो भले ही हम बाहरी रूप से उसे गलत ना माने लेकिन आतंरिक स्तर पर हमें सुकून का एहसास नहीं होता है और ऐसी स्थिति में हम चाहकर भी धैर्य नही रख पाते हैं.

विपरीत परिस्थिति में अगर हम धैर्य का दामन पकड़े रहे तो निश्चित रूप से हम उस स्थिति से बाहर आ जाएँगे,क्योंकि जब भी कोई समस्या आती है तो उसका समाधान भी होता ही है.लेकिन हम इतने अधैर्य हो जाते हैं कि वो समाधान हमारी आँखों के सामने होते हुए भी उसे देखना मुश्किल हो जाता है.धैर्य के रास्ते पर भले परिणाम मिलने में थोडा समय लग सकता है लेकिन  अगर रास्ता सही है और खुद पर  विश्वास है तो राहें आसान लगने लगती हैं

‘’स्वयं पर विश्वास और धैर्य का साथ’’ हो तो जिन्दगी की कठिनाईयों से हम परेशान तो होंगे लेकिन हारेंगे नहीं

तो बस धैर्य का दामन पकडिये और जिन्दगी का अनुभव कीजिए

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