भारतीय लोकतंत्र में चौथे स्तंभ की भूमिका हमेशा से महत्वपूर्ण रही है। लेकिन आजकल अगर कोई पत्रकार सवाल पूछता है, सरकार की नीतियों पर आलोचना करता है, तथ्य सामने रखता है, तो तुरंत लेबल लग जाता है “जातिवादी”, “धर्म विरोधी”, “सरकार विरोधी”, “देशद्रोही”, “आतंकवादी” और सबसे आम “मोदी विरोधी”। सत्ता पक्ष से बस एक ही … Continue reading पत्रकारिता करो तो आप जाति, धर्म, सरकार विरोधी, और आतंकवादी। सरकार कहे आपको समस्या क्या है? आप मोदी विरोधी हो ! लगता है बहुत जान बाकी है कलम में!
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