प्रताड़ित महिलाओं को समाज दे भावनात्मक सहयोग।

हवस के भूखे दरिंदे के द्वारा अंजाम दिए गए वीभत्स घटना के बाद कोई लड़की कैसे सरवाइव करती है।लक्ष्मी अग्रवाल, डॉली,मधु,ऋतु,रूपा,शबनम और ऐसी न जाने कितनी लड़कियां हैं जो इस तरह के हमले का शिकार हुई हैं।जो आज किसी तरह संघर्ष कर अपनी जिंदगी जी रही हैं।एक दरिंदा इस तरह से हमला कर,घटना को अंजाम देकर चला जाता है,परंतु जिस किसी पर भी यह हमला होता है उसे मानसिक,शारीरिक,आर्थिक,सामाजिक हर तरह से कष्ट झेलना पड़ता है।यह तो कल्पना की ही जा सकती है कि ऐसी लड़की की शादी और नौकरी के लिए कितनी समस्या उत्पन्न हो जाती है।ऐसे हमले का शिकार एक-दो लड़कियां ही होती हैं,जो हिम्मत और हौसले से आगे बढ़ती हैं।जबकि ज्यादातर टूट जाती हैं और जिंदगी से हार कर सीमित दायरों में बंद कर रह जाती हैं।इस प्रकार के घृणित और वीभत्स घटना को अंजाम देने की कोई एक वजह नजर नहीं आती।

कहा जाता है कि फिल्में समाज का आईना होती है। भारतीय सिनेमा ने अपने शुरुआती काल से ही हमें देखने के लिए हर तरह की फिल्में दी हैं। सामाजिक, पारिवारिक, देशभक्ति, कॉमेडी और कभी-कभी गंभीर और शिक्षाप्रद फिल्मों को भी हमने देखा है। हाल के कुछ वर्षों में हमने तारे जमीं पर, थ्री इडियट, टॉयलेट एक प्रेम कथा, पैडमैन जैसी फिल्में भी देखी जो समाज को एक गंभीर संदेश देती हैं। हाल में आई मेघना गुलजार द्वारा निर्देशित और दीपिका पादुकोण के सहयोग से निर्मित फिल्म ‘छपाक’ एक ऐसी ही गंभीर फिल्म है, जो एसिड अटैक से पीड़ित एक लड़की के जीवन पर आधारित है। इस फिल्म में हम देखते हैं कि हवस के भूखे दरिंदे के द्वारा अंजाम दिए गए वीभत्स घटना के बाद कोई लड़की कैसे सरवाइव करती है। फिल्म की कहानी 12वीं में पढ़ने वाली एक 19 वर्षीय लड़की की है,जो गर्ल्स स्कूल में पढ़ती है। पास में ही रहने वाला एक 35 वर्षीय दर्जी उसे काफी पसंद करता है, और उससे शादी करना चाहता है। लड़की उसके साथ शादी करने से इनकार कर देती है और गुस्से में वो दर्जी उससे बदला लेने की ठान लेता है।एक दिन मौका मिलते ही वो अपनी एक परिचित महिला से उस लड़की पर तेजाब फिंकवा देता है।एसिड हमले से लड़की का चेहरा बुरी तरह जल जाता है और फिर उसकी पूरी जिंदगी बदल जाती है।एक खूबसूरत आम लड़की,जिसने अपनी जिंदगी के लिए ढेर सारे सपने देखे थे,अचानक से सब कुछ खत्म होता प्रतीत होता है।उसे कितने परेशानी का सामना करना पड़ता है और वह किस तरह संघर्ष करती है।परंतु हिम्मत नहीं हारती है और अपने हिम्मत और हौसले की बदौलत एक बार फिर से अपनी जिंदगी को रास्ते पर लाने में सफल होती है।यह मात्र एक एसिड अटैक पीड़िता की कहानी है।जबकि लक्ष्मी अग्रवाल, डॉली,मधु,ऋतु,रूपा,शबनम और ऐसी न जाने कितनी लड़कियां हैं जो इस तरह के हमले का शिकार हुई हैं।जो आज किसी तरह संघर्ष कर अपनी जिंदगी जी रही हैं।एक दरिंदा इस तरह से हमला कर,घटना को अंजाम देकर चला जाता है,परंतु जिस किसी पर भी यह हमला होता है उसे मानसिक,शारीरिक,आर्थिक,सामाजिक हर तरह से कष्ट झेलना पड़ता है।यह तो कल्पना की ही जा सकती है कि ऐसी लड़की की शादी और नौकरी के लिए कितनी समस्या उत्पन्न हो जाती है।ऐसे हमले का शिकार एक-दो लड़कियां ही होती हैं,जो हिम्मत और हौसले से आगे बढ़ती हैं।जबकि ज्यादातर टूट जाती हैं और जिंदगी से हार कर सीमित दायरों में बंद कर रह जाती हैं।इस प्रकार के घृणित और वीभत्स घटना को अंजाम देने की कोई एक वजह नजर नहीं आती।एक सर्वे के अनुसार एसिड अटैक के 59 फ़ीसदी मामले अविवाहित युवतियों के साथ हुए हैं,तो 41 फ़ीसदी विवाहित महिलाओं पर भी तेजाब फेंकने की घटना हुई है।फिल्म ‘छपाक’ में जहां लड़की पर हमला करने वाला उससे शादी करना चाहता था और इंकार के बाद प्रतिशोध में उसने ऐसा किया तो वहीं एसिड अटैक पीड़िता ‘रूपा’ के चेहरे पर उसकी सौतेली मां ने ही तेजाब फेंक दिया जबकि मेरठ की रहने वाली ‘आसमा’ के पेट पर उसके ससुराल वालों ने तब तेजाब फेंक दिया जब वह गर्भवती थी।इस हमले में ‘आसमा’ बुरी तरह जल गई और उसका बच्चा भी मर गया।वहीं एसिड अटैक की शिकार हुई गरिमा पर तब किसी ने एसिड फेंक दिया था जब वह छठी कक्षा में पढ़ती थी।वो भी किसी अनजान ने।बिहार के भागलपुर में पिछले वर्ष घर में घुसकर तीन नकाबपोश ने एक 17 वर्षीय लड़की पर तेजाब उड़ेल दिया।दरिंदों ने क्यूँ इस घटना को अंजाम दिया,इसका कुछ पता नहीं चल सका।ऐसे संभावना व्यक्त की जा रही है कि तीनों नकाबपोश बच्ची का सामूहिक बलात्कार करना चाह रहे थे और विरोध करने पर उन्होंने इस तरह की घटना को अंजाम दिया।ऐसे और भी कई घटनाएं हैं जो देश के विभिन्न हिस्सों में लगातार हो रही है।पीड़िताएं विभिन्न प्रकार के कष्ट से गुजर रही हैं,जिसमें सबसे महत्वपूर्ण होता है आर्थिक संकट।ऐसी पीड़िताओं को समाज में सहानुभूति तो मिलती है परंतु आर्थिक सहयोग नहीं मिल पाता है।हालांकि फिल्म के रिलीज होने के बाद कुछ प्रदेशों में सरकारों ने इन पीड़िताओं को पेंशन देने की घोषणा की है।उत्तराखंड सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने एसिड अटैक पीड़ितों को लेकर बयान दिया है कि सरकार एसिड अटैक की पीड़ितों के लिए योजना शुरू करने जा रही है।जल्द ही सरकार 5 से 6 हजार रुपए प्रतिमाह देने का प्रस्ताव कैबिनेट में लाने जा रही है।वहीं बिहार सरकार ने एसिड अटैक पीड़ितों को 7 से 8 लाख रुपए मुआवजा और आजीवन 10 हजार रुपए प्रतिमाह सहायता देने की घोषणा की है।हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकार ने एसिड अटैक पीड़ितों को 3 लाख मुआवजा देना तय किया है।जबकि हिमाचल प्रदेश में ही एसिड अटैक दो पीड़ितों के लिए वहां के एक न्यायालय ने राज्य सरकार को 25-25 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है।यह मामला 2005 का है।इसी तरह विभिन्न प्रदेशों की सरकारों ने अपने-अपने यहाँ मुआवजा तय कर रखी है,जो एक अच्छी पहल है।साथ ही साथ इन पीड़ितों के लिए मुफ्त मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराने की बात भी कही गई है।हालांकि 2004 के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में टिप्पणी करते हुए कहा कि “एसिड अटैक के दोषियों के साथ नरमी बरते जाने की कोई गुंजाइश नहीं है।इस हमले के बाद पीड़िताओं को जो भावनात्मक आघात पहुंचता है उसकी भरपाई किसी भी मुआवजे से नहीं की जा सकती है।” निःसन्देह कोई भी मुआवजा इन पीड़िताओं के कष्ट की भरपाई नहीं कर सकता है।सभ्य समाज में इस तरह की घटना को अंजाम देने वाले दरिंदों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए,जो अपने हवस,चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक,को पूरा करने के लिए इस हद तक चले जाते हैं।इन पीड़ितों को निश्चित रूप से हर तरह के आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।इन्हें आर्थिक ही नहीं,भावनात्मक सहयोग भी मिलनी चाहिए।जो सरकार नहीं घर,परिवार और समाज ही दे सकता है।

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