बिहार में स्वास्थ्य सेवा के एक नए युग का सूर्योदय: राज्य के पहले कैडेवरिक लिवर ट्रांसप्लांट का सफर

एक सर्जन के रूप में, मैंने अक्सर अपने बिहार के उन मरीजों की आँखों में मौत का भय देखा है, जिनके लिवर ने काम करना बंद कर दिया था। उनकी पीड़ा के साथ-साथ, उस निराशा को भी महसूस किया है, जब उन्हें पता चलता था कि जीवन का एकमात्र सहारा, एक लिवर ट्रांसप्लांट, दिल्ली या चेन्नई जैसे शहरों में ही संभव है। यह लाचारी ही मेरे लिए सबसे बड़ी पीड़ा थी। यही वह क्षण था जब मैंने और एम्स पटना की मेरी समर्पित टीम ने एक संकल्प लिया: बिहार की धरती पर पर ही एक ऐसी ट्रांसप्लांट व्यवस्था खड़ी करनी है, जो विश्वस्तरीय हो। आज, मैं आप सभी के सामने न केवल एक डॉक्टर के रूप में, बल्कि एक गर्वित और विनम्र बिहारी के रूप में यह घोषणा करते हुए हृदय को गर्व से भरा हुआ महसूस कर रहा हूं कि हमने अपना वादा पूरा किया है। हमने बिहार में इतिहास रचते हुए पहला सफल कैडेवरिक लिवर ट्रांसप्लांट करने में सफलता प्राप्त की है।

यह केवल एक सर्जरी नहीं थी, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुसंधान और एक दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम था। एक ऐसी उच्च-तकनीकी टीम का गठन करना, जो इस जटिल प्रक्रिया को अंजाम दे सके, मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। जब मैंने अपने हाथों में उस दान किए गए लिवर को लिया, जो एक 45 वर्षीय व्यक्ति को नया जीवन देने वाला था, तो यह मेरे पूरे करियर का सबसे महत्वपूर्ण पल था। लगभग 12 घंटे चली इस सूक्ष्म सर्जरी का हर पल, हर निर्णय, हमारी टीम की एकजुटता और दक्षता का प्रमाण था। आज वह मरीज स्वस्थ हो रहा है और अपने परिवार के साथ नए सपने सपने देख रहा है। यही सफलता एक डॉक्टर के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है।

लेकिन इस सफलता की सबसे बड़ी नायिका कोई डॉक्टर नहीं, बल्कि एक अज्ञात दाता हैं। उनके और उनके परिवार के उस निस्वार्थ निर्णय ने, जो अपने गहन दुःख के पल में भी दूसरों के जीवन की चिंता करते हुए अंगदान का फैसला लिया, यह साबित कर दिया कि मानवता सबसे बड़ी शक्ति है। वह परिवार इस मिशन का असली हीरो है।

और अब, मैं आप सभी बिहारवासियों से एक निवेदन करना चाहूंगा। मेरी टीम ने साबित कर दिया है कि अब हमारे पास वह काबिलियत और संसाधन हैं जो यहाँ के लोगों की जान बचा सकते हैं। लेकिन एक सर्जन के पास चाहे कितनी भी कुशलता क्यों न हो, वह बिना अंगदान के कुछ नहीं कर सकता।

इसलिए, मेरा आप सभी से अनुरोध है कि जागरूक बनें। अपने परिवार में अंगदान के महत्व पर चर्चा करें। इस जीवनदायिनी परंपरा का हिस्सा बनने का संकल्प लें। याद रखें, आपकी एक सूझदारी भरी सहमति आठ लोगों को जीवन दे सकती है

हमने बिहार के स्वास्थ्य इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ा है। अब हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि इसे एक जनआंदोलन बनाएं। मेरा दृढ़ विश्वास है कि आपके सहयोग से, यह पहला सफल ट्रांसप्लांट बिहार में हजारों नई जिंदगियों का आधार बनेगा। आइए, मिलकर एक स्वस्थ और मजबूत बिहार का निर्माण करें।

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