बेटा, ज़िंदगी आसान भी है और मुश्किल भी फ़र्क केवल नज़र के ज़ाविए का है।

डॉ. मुश्ताक अहमद शाह प्रिय अमन, मेरी आँखों के तारे, नूर‑चश्म,बेटा, तुम बचपन में मेरे कंधे पर सिर रखकर ज़िद किया करते थे, कभी नए खिलौने के लिए, कभी एक और चॉकलेट के लिए, और कभी बस यूँ ही मेरी गोद में सो जाने के लिए। आज वही सब बातें, वही सब अहसास इस ख़त … Continue reading बेटा, ज़िंदगी आसान भी है और मुश्किल भी फ़र्क केवल नज़र के ज़ाविए का है।