भगवद्गीता में अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा था,मन अत्यंत चंचल, प्रमथनशील और दृढ़ है, इसे वश में करना हवा को बाँधने जैसा दुष्कर है।”

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह, सहज़, हरदा, मध्य प्रदेश “मन रे तू काहे न मेरी बात सुने…” यह उक्ति केवल एक काव्य पंक्ति नहीं, बल्कि मानव चेतना की सबसे बड़ी चुनौती और सत्य को रेखांकित करती है। मनुष्य मन अत्यंत चंचल, अस्थिर और असीम इच्छाओं का केंद्र है। वह भूतकाल की स्मृतियों में भटकता है या … Continue reading भगवद्गीता में अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा था,मन अत्यंत चंचल, प्रमथनशील और दृढ़ है, इसे वश में करना हवा को बाँधने जैसा दुष्कर है।”