भ्र्ष्टाचार के आगोश में प्रदेश के प्रखंड सह अंचल कार्यालय।

अपने बिहार में भ्रष्टाचार आज बहुत बड़ी समस्या बन चुकी है।प्रदेश का शायद ही ऐसा कोई सरकारी कार्यालय है जो भ्रष्टाचार से मुक्त है।आंकड़े बताते हैं कि देश के सबसे भ्रष्ट राज्यों की सूची में बिहार दूसरे स्थान पर है।भ्रष्टाचार को सरकारी कर्मी हराम नहीं हक समझने लगे हैं।यह बेहद अफसोस की बात है कि शादी ब्याह के लिए लड़के ढूंढने वाले लड़के की तनख्वाह से ज्यादा ऊपरी आमदनी को तवज्जो देते हैं।ऐसा लगता है मानो घूस लेना सरकारी कर्मियों के रक्त में शामिल हो गया है।

देश के विभिन्न प्रदेशों का तो पता नहीं परंतु अपने बिहार में भ्रष्टाचार आज बहुत बड़ी समस्या बन चुकी है।प्रदेश का शायद ही ऐसा कोई सरकारी कार्यालय है जो भ्रष्टाचार से मुक्त है।आंकड़े बताते हैं कि देश के सबसे भ्रष्ट राज्यों की सूची में बिहार दूसरे स्थान पर है।भ्रष्टाचार को सरकारी कर्मी हराम नहीं हक समझने लगे हैं।यह बेहद अफसोस की बात है कि शादी ब्याह के लिए लड़के ढूंढने वाले लड़के की तनख्वाह से ज्यादा ऊपरी आमदनी को तवज्जो देते हैं।ऐसा लगता है मानो घूस लेना सरकारी कर्मियों के रक्त में शामिल हो गया है।प्रदेश का सबसे शक्तिशाली सरकारी कार्यालय सचिवालय हो, विभिन्न जिलों के कार्यालय हो या फिर प्रदेश सरकार के शासन व्यवस्था की सबसे छोटी इकाई प्रखंड सह अंचल कार्यालय हो,पूरी तरह भ्रष्टाचार के आगोश में है।प्रदेश के छोटे से लेकर बड़े थानों के बारे में तो कहने की आवश्यकता ही नहीं है,क्योंकि पाठक उससे अच्छी तरह अवगत हैं।निःसन्देह सरकारी कार्यालय किसी भी प्रदेश सरकार के शासन व्यवस्था का आईना होते हैं।इन कार्यालयों को देखकर यह अनुमान लग जाता है कि प्रदेश की सत्ता पर काबिज राजनेता की क्या विचारधारा है या वह आम जनता के प्रति कितनी जवाबदेह है।यदि हम बात प्रखंड सह अंचल कार्यालय की करें तो यह कार्यालय ग्रामीण क्षेत्रों की आम जनता के साथ ही साथ पूरे प्रखंड के विभिन्न प्रकार के विकास,शिक्षा,कृषि सहित जमीनी विवाद को काफी हद तक कम करने के लिए जवाबदेह होता है।आम जनता के कई महत्वपूर्ण आवस्यकताओं को पूरी करने में सक्षम यह कार्यालय आज पूरी तरह भ्रष्टाचार में डूबा है।प्रदेश का शायद ही ऐसा कोई प्रखंड सह अंचल कार्यालय है जो इससे अछूता है।इन कार्यालयों में किसी भी प्रकार का काम यहां मौजूद बिचौलियों के बगैर नहीं हो सकता।यदि आप बिचौलियों से संपर्क नहीं करते तो मुमकिन है किसी मामूली से काम के लिए आपको महीनों कार्यालय का चक्कर लगाना पड़े और संभव है तब भी आपका का न हो।प्रखंड विकास पदाधिकारी,अंचलाधिकारी और अन्य प्रखंड कार्यालय के अधिकारियों का पद बेहद मालदार बन गया है।ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनी विवाद के काफी अधिक मामले होते हैं।जमीन का रसीद कटवाना हो,रजिस्टर में नाम चढ़ाना हो या फिर ऑनलाइन नाम चढ़ाना हो,यहां के अधिकारी,कर्मचारी और बिचौलियों की मिलीभगत से रजिस्टर-2 के पन्ने गायब कर दिए जाते हैं।जानबूझकर ऑनलाइन नाम चढ़ाने में गलती की जाती है और फिर खेल शुरू होता है उसे सुधारने का। जिसके एवज में बिचौलिए भूस्वामी से मोटी रकम ऐंठते हैं।यहाँ के कर्मचारी और अधिकारी जानबूझकर कार्यालय से गायब रहते हैं जिससे बिचौलियों का काम आसान हो जाता है।प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय की हालत भी शर्मनाक है।प्रदेश के बदहाल शिक्षा व्यवस्था के लिए यह कार्यालय काफी हद तक जिम्मेदार है। प्रखंड कार्यालय में पदस्थापित बिचौलिया रूपी शिक्षकों के माध्यम से प्रखंड के विभिन्न सरकारी विद्यालयों में मासिक कमीशन तय होता है। सरकारी विद्यालयों के प्राचार्य इस कार्यालय में चढ़ावा चढ़ाते हैं,जिस वजह से मध्यान भोजन सहित अन्य योजनाओं का लाभ पूरी तरह बच्चों को नहीं मिल पाता।ऐसे कई शिक्षक हैं जो प्रखंड कार्यालय में पदस्थापित शिक्षकों को चढ़ावा देते हैं और वो अपनी ड्यूटी से गायब रहते हैं।ये बिचौलिए ऐसे शिक्षकों की लिस्ट रखते हैं और ड्यूटी ना करने वाले ऐसे शिक्षकों के लिए वो ढाल बनकर उनकी रक्षा करते हैं।नतीजा सरकारी विद्यालयों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उम्मीद करना ही बेवकूफी नजर आती है।ऐसे कई विद्यालयों के शिक्षक हैं जो ग्रामीणों की शिकायत पर स्पष्ट कहते हैं कि जहां शिकायत करना है करो, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों और कर्मियों से तो पचास हजार से एक लाख रुपए तक की मांग की जाती है। देने के बाद ही उनकी सेवानिवृत्ति के बाद का काम पूरा होता है।प्रखंड कार्यालय में पदस्थापित शिक्षकों और अधिकारियों के संपत्ति की यदि जांच की जाए तो शायद ही कोई हो जो जेल जाने से बचे।दुनिया के तीन सबसे बड़े विश्वविद्यालय यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया,यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो और लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स के स्कॉलर ने भारत की नौकरशाही भ्रष्टाचार पर किए गए शोध में खुलासा किया है कि बिहार के नौकरशाह सबसे भ्रष्ट हैं।इंडिया करप्शन सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक बिहार के 75 फ़ीसदी लोगों ने यह स्वीकार किया है कि उन्हें काम करवाने के लिए अधिकारियों को रिश्वत देनी पड़ी है।हमारी सरकार लगातार प्रदेश में सुशासन का दावा करती है।सुशासन का नाम लेकर वर्तमान सरकार के मंत्री और सरकार के मुखिया अपनी पीठ खुद थपथपाते रहते हैं।काश कि कभी हमारे सरकार प्रदेश की जनता के भले के लिए इन सरकारी कार्यालयों,विशेषकर प्रखंड सह अंचल कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार को भी देख पाते।शायद आंखों पर काला चश्मा लगाए हमारे सरकार को सरकारी कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार नजर ही नहीं आते।

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