​मैं आसमान थोड़ी हूँ

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह,सहज़,हरदा, मध्य प्रदेश बिछड़ने का ग़म साफ़ था उसकी नज़रों में , मुझसे कह रहा था कि मैं बेक़रार थोड़ी हूँ। तमाम उम्र मैंने नाम ये उसके ही लिख डाली, ज़बान से अब मुकर जाऊं वो इंसान थोड़ी हूँ। बड़े ताबा, बड़े रौशन, सपने टूट ही जाते हैं। सब को दामन में … Continue reading ​मैं आसमान थोड़ी हूँ