युवाओ का देश अपना देश भारत और अगर देश युवाओ का है तो बात युवाओ की होनी चाहिए

धर्म , जाति , पार्टी और सत्ता का खेल कभी हमारे जीवन के अन्य खेल का हिस्सा हुआ करता था पर आज उलट है । आज धर्म , जाति , पार्टी और सत्ता का खेल हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हो चुका है । यह देश के भविष्य से खिलवाड़ है । एक समय ऐसा भी था, जब हमारे देश को सोने की चिड़िया कहा जाता था । फिर अचानक एक समय आया, समय था लोक सभा चुनाव 2014 और बोला जाने लगा युवाओ का देश अपना देश भारत और अगर देश युवाओ का है तो बात युवाओ की होनी चाहिए, फिर तो बात शिक्षा और रोजगार की भी होनी चाहिए पर ये हमारा दुर्भाग है और हमारे  देश का भी की इस की बात कोई नहीं करता ।

बस मेरे जहन में एक ही नाम आता है और वो नाम है देश के जाने माने पत्रकार रविश कुमार , जिन्होने शिक्षा व्यवस्था को ले कर हर बार आवाज उठाई और सरकार से प्रश्न भी किया। अभी कुछ ही साल पहले की ही बात है, जब वह एनडीटीवी में होते थे तो इन्होने अपने प्राइम टाइम शो में यूनिवर्सिटी सीरीज नाम से एपिसोड चलाया था , जो सच्ची तस्वीर है हमारे शिक्षा व्यवस्था की, लेकिन सरकार तो सरकार है उनके लिए इन चीजों का कोई महत्व ही नहीं है ।

बात यही खत्म नहीं होती

बात यही खत्म नहीं होती, अब तो बात देश की उन तकनिकी सस्थानो तक पहुंच चुकी है, जिन के रैंकिंग को ले कर सरकार खुद की उपलब्थिया गिनाया करती है , हा मैं बात कर रहा है IISC, IIT, NIT, IISER जैसे सस्थानो की, जो की देश की पहचान है , और आज वहाँ रिसर्च कर रहे स्टूडेंट के हाल ये है की उनकी बातो  को कोई सुन तक नहीं रहा है , और उन्हें अपने जायज  बातो के लिए भी प्रदर्शन करने पड़ रहे है। अभी हाल में ही देश भर के रिसर्च स्कॉलर्स ने फैलोशिप में बढ़ोतरी किये जाने को ले कर बिरोध प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन में देश ही नहीं दुनिया में अपनी पहचान रखने वाले संसथान जैसे की IIT, IISC, IISER के रिसर्च स्कॉलर  शामिल हुए , केवल यही नहीं इस विरोध प्रदर्शन में आर्ट्स , साइंस ,आदि स्ट्रीम के रिसर्च स्कॉलर ने भी अपनी आवाज उठाई। इस प्रदर्शन का कारन यह है की मानव संसाधन विकाश मंत्रालय (MHRD) की और से वर्तमान में JRF स्कॉलर्स  को 25000 और SRF स्कॉलर्स को 28000 रुपये प्रतिमाह फैलोशिप दी जाती है , जो की 2014 में लागु की गए थी और आज तक बढ़ाया नहीं गया।

अगर बात बेतन बढ़ाने की हो तो

अगर बात बेतन बढ़ाने की हो तो महगाई को धयान में रखते हुए बधाई जाती है , और ये देश के प्रधान सेवक (PRIME MINISTER ) और वित् मंत्रालय से ज्यादा अच्छा और कौन समझेगा , जिन्होंने अपना और अपने साथियो ( सांसदों )का मूल वेतन अप्रैल से सीधे दुगना कर दिया , क्योंकी  महंगाई बढ़ गए ,क्युकी  इनका परिवार है, इनकी जरूरते है और सबसे अहम् बात क्यों की ये सरकार है तो इन्होने बढ़ा ली। और एक तरफ देश का आने वाला कल युवा रिसर्च स्कॉलर्स की जरूरतों को कोई सरकार सुन तक नहीं रही है ,महगाई तो इन क लिए भी बराबर बढ़ी है , जरूरते तो इनकी भी है ,

युवाओं का सुनो

परिवार तो इनका भी है फिर इन इनके लिए अलग निति क्यों ????? क्यों देश के युवा रिसर्च स्कॉलर्स को सरकार अनदेखा कर रही है ?? क्यों शिक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है? और अगर यही होती रहा तो सोचने वाली बात है युवाओ के भविष्य का क्या होगा और जब युवाओ का भविष्य ही नहीं होगा तो युवाओ का  देश का भविष्य कैसा होगा। सोचिये जरा सरकार  ।।।। Anupam Kumar-युवा पत्रकार

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