वह समझ चुका था कि यह मोहब्बत नहीं, बल्कि एक ख़तरनाक फ़रेब था

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह , सहज़,हरदा, मध्य प्रदेश शाम का वक्त था और पार्क के सुनहरी साए लंबे हो रहे थे। हवा में एक अजीब सा उदास सुकून घुला हुआ था। कबीर वहीं एक बेंच के पास खड़ा था और उसके कदम जैसे जमीन में गड़े हुए थे। कुछ ही फासले पर, जिंदगी का एक … Continue reading वह समझ चुका था कि यह मोहब्बत नहीं, बल्कि एक ख़तरनाक फ़रेब था