“वो एक सवारी क्या उतरी थी… मैं तो भरी ट्रेन में भी अकेला हो गया था
डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह,सहज़, हरदा, मध्य प्रदेश ट्रेन के डिब्बे में लोगों की चहल-पहल थी, पटरियों पर लोहे के टकराने की गड़गड़ाहट और बाहर गुज़रते हुए मंज़र… सब कुछ हमेशा जैसा ही था। लेकिन उस दिन, उस एक सफ़र में कुछ अलग था। सामने वाली सीट पर आकर बैठी । उसने बस एक बार सर … Continue reading “वो एक सवारी क्या उतरी थी… मैं तो भरी ट्रेन में भी अकेला हो गया था
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