शब्दों की सुगंध और हमारा साहित्यिक प्रयास सांस्कृतिक धरोहर के जीवंत हस्ताक्षर

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज, हरदा, मध्य प्रदेश साहित्य केवल शब्दों का जोड़ या कोरी कल्पनाओं का आख्यान नहीं है, बल्कि यह किसी भी राष्ट्र की अंतरात्मा की जीवंत आवाज़ है। जब भावों को भाषा का रूप मिलता है, तो वह सिर्फ़ पन्ने पर उकेरी गई इबारत नहीं रहती, बल्कि शब्दों की एक दिव्य सुगंध … Continue reading शब्दों की सुगंध और हमारा साहित्यिक प्रयास सांस्कृतिक धरोहर के जीवंत हस्ताक्षर