शादी –कल और आज

विवाह या शादी शब्द सुनते ही हमारे मन में दूल्हा ,दुल्हन ,बाजे,बारात और ढेर सारी रस्मों की तस्वीरें उभरने लगतीं हैं.शादी की परंपरा सदियों से चली आ रही है.पहले भी शादियाँ होती थी,आज भी होती हैं आगे भी होती रहेंगी.लेकिन कल और आज की शादियों में जमीन-आसमान का फर्क आ गया है.पहले जहाँ शादी सादगी और सुसभ्य तरीके से हुआ करती थी ,वहीँ आज कि शादियों में दिखावे का प्रचलन जोरों पर है.आज कि शादियों में बॉलीवुड का पुरजोर असर दिखाई देता है.फ़िल्मी कलाकार जो भी अपनी जिन्दगी में करते हैं , उनकी कॉपी करने के लिए समाज में  कुछ लोग हमेशा तैयार खड़े रहते हैं बिना ये समझे कि उनकी दुनिया अलग है और हमारी अलग.आज कि शादियों का हाल देखकर तो भैया सिर धुनने का मन करता है.कुछ शादियों में तो ऐसा फूहड़पन देखने को मिलता है जैसे ये शादी नहीं कोई मजाक हो.

           पहले कि शादियों में बेटी का बाप एक पढ़ा-लिखा ,सुसभ्य दामाद और इज्जतदार समधियाने को प्राथमिकता देता था लेकिन आज सिर्फ लड़के वाले का बाहरी स्टेटस देखा जाता है.भले ही वो स्टेटस एक धोखा हो. कई बार सब कुछ जानते-समझते हुए भी समाज के सामने अपनी धाक ज़माने के लिए लोग ऐसा लड़का और परिवार चुन लेते हैं जिनकी वजह से उनकी बेटी का जीवन नर्क हो जाता है.

पहले की शादी सादगीपूर्ण ढंग से होती थी.बेटी के बाप कि जमापूंजी खर्च तो होतीथी लेकिन वो खर्च सार्थक प्रतीत होता था.कर्ज लेने  कि नौबत उस समय भी आती थी लेकिन दिल को एक सुकून होता कि एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई गई है.परन्तु आज जितना  खर्च एक शादी करने में होता है उसका दुगुना खर्च बेकार के दिखावे में हो जाता है .बहुत सारे ऐसे फालतू के खर्चें हैं या आजकल की रस्में हैं जिनमे लाखों रूपये बेमतलब में उड़ जाते हैं. हम फ़िल्मी कलाकारों को देखकर उनके जैसा करने कि कोशिश करते हैं और लाखों के कर्जे में डूबकर पूरी जिन्दगी का तनाव अपने सिर ले लेते हैं.आजकल की शादी सिर्फ घरवालों के लिए   ही नहीं बल्कि आने वाले मेहमानों के लिए भी परेशानी का सबब बन जाती है.हर रस्म के लिए नए कपडे और गहने का प्रचलन इस कदर हावी है कि मिडिल क्लास फॅमिली को शादी में जाने से  पहले कई बार सोचना पड़ता है.उस पर तुर्रा यह है कि जो कपडे आपने एक शादी में पहन लिया उस कपडे को आप दूसरी शादी के फंक्शन में नही पहन सकते क्योंकि आज सोशलमीडिया का जमाना है .

आज के युवाओं को समझना चाहिए कि शादी के लिए एक सही जीवनसाथी का चुनाव करें क्योंकि अगर साथी नही सही  हुए तो पूरी जिन्दगी ही बर्बाद हो जानी है. रस्में जरुर होनी चाहिए क्योंकि शादी आपके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है लेकिन उन उलजुलूल रस्मों को हटाइए जो आगे चलकर  आपके लिए मुसीबत बन जाते है और आप  कर्ज के भंवर में डूब जाते हैं. जिस समाज को दिखाने के लिए आप ये सब दिखावा करते है ,मुसीबत  आने पर इस समाज से कोई आपकी मदद के लिए आगे नही आएगा .

इसलिए शादी इस तरह से कीजिए जो एक खुबसूरत दास्ताँ बन जाए न कि पूरी जिन्दगी की भयावह कहानी .

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