शाम का सूरज आहिस्ता-आहिस्ता क्षितिज में डूब रहा था,ओर वो दोनों साथ चल रहे थे

डॉ.मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़, हरदा, मध्य प्रदेश वह सुनहरी दोपहर थी जब दफ़्तर में दाख़िल हुआ और काग़ज़ पर नज़र डाली, तो पलट कर देखा कि सामने एक नई दुनिया थी। म्युनिसिपल हाई स्कूल का वह पुराना कमरा,  और खिड़की से आते हुए अमरूद के पत्तों की सरसराहट सुनाई दे रही थी। ज़हैब और आलया … Continue reading शाम का सूरज आहिस्ता-आहिस्ता क्षितिज में डूब रहा था,ओर वो दोनों साथ चल रहे थे