श्यामनन्दन मिश्र

स्व. श्री श्यामनन्दन मिश्र, सर गणेश दत्त सिंह के चचेरे भाई देव नारायण सिंह का नाती हैं। सर गणेश दत्त सिंह बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से पहला व्यक्ति हैं जिन्होंने बैरिस्ट्री पास किय था। अंग्रेजी शासन के दौरान 1912 के पहले बिहार बंगाल का अंग था और कलकत्ता हाईकोर्ट के अधीन आता था। सर गणेश दत्त सिंह ही पहले आदमी थे जिन्होंने अंग्रेज गवर्नर से मिलकर बिहार को बंगाल से अलग प्रांत बनवाया और उसके बाद बिहार की राजधानी पटना बनाई गई और देश में छठा हाईकोर्ट के रूप में पटना हाईकोर्ट का गठन किया गया। तत्कालीन बिहार वर्तमान समय में तीन राज्य- ‘बिहार, झारखंड और उड़ीसा’ में विभक्त है।
श्यामनन्दन मिश्र का पैतृक गांव पिपरा है जो वर्तमान समय में सुगौली समझौताके बाद नेपाल में चला गया। इनका जमीन और जमींदारी उसी क्षेत्र में था जो मधुबनी जिले में पड़ता था पर देश की आजादी के बाद जमींदारी प्रथा को समाप्त कर दिया गया। इनकी आरंभिक से लेकर काॅलेज तक की शिक्षा मुजफ्फरपुर में हुआ। कानून की पढ़ाई इन्होंने पटना विश्वविद्यालय से किया। अपने छात्र जीवन में ही वे स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ गए और भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 1942 में वे बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह के साथ पटना के गांधी मैदान से गिरफ्तार हुए। इन्हें दो साल के जेल की सजा हुई और जब वे जेल से बाहर आए तो पुनः स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ गए। इन्हेंने बिहार वैभव और लिब्रेटर नाम की दो पत्रिकाओं का भी संपादन किया।
इनके राजनीतिक जीवन का असली सूत्रपात 1950 से माना जाता है। देश की आजादी के बाद जब श्रीकृष्ण सिंह ने बिहार के पहले मुख्यमंत्री बने तो कंस्टटुएंट असेंबली में बिहार से पांच सीट खाली हुई। इन्हीं पांच में से एक सीट पर ये असेंबली पहुँचे। 1952 में जब पहले आम चुनाव में में इन्होंने दरभंगा महाराज को 1.25 लाख वोटों से पराजित किया और देश के पहली संसद के सदस्य बने। नेहरू जी ने इनकी प्रतिभा को पहचाना और इन्हें 1952-54 अपना पार्लियामेंट सेक्रेटरी बनाया। 1954 में इन्हें डिप्टी मिनिस्टर प्लानिग बनाया गया और इस पद पर ये 1962 तक बने रहे। 1962 से 1971 तक ये राज्य सभा के सदस्य रहे। 1967 से 1969 तक कांग्रेस (ओ) संसदीय दल के नेता भी रहे तथा 1969 से 1971 के बीच ये राज्य सभा में विपक्ष के नेता भी रहे। 1979-80 के बीच चैधरी चरण सिंह के मंत्रिमंडल में ये भारत के विदेश मंत्री रहे। इसके अलावे भारत के संसदीय प्रतिनिधि के रूप में इन्होंने कई विदेश यात्राएं की और विभिन्न देशों जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका, तत्कालीन सोवियत संघ, चीन, जापान आदि देश शामिल हैं, के साथ भारत के संबंध को प्रगाढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। ओजस्वी सांसद, विशिष्ट विद्वान, प्रखर वक्ता, आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ, योजना की गहरी समझ रखने वाले श्री श्यामनन्दन मिश्र की पकड़ हिन्दी, अंग्रेजी और संस्कृत; तीनों ही भाषाओं में समान रूप से थी। इन्होंने कई पुस्तकों की भी रचना की जिनमें से कुछ तो प्रकाशित हो चुके हैं और कुछ अभी भी अप्रकाशित है। इनका निधन 2004 ई. में पटना स्थित इनकी इकलौती पुत्री मुन्नी कुमारी के आवास पर हुई। 

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