सवर्णों का विरोध

सवर्ण संगठनों के द्वारा एससी एसटी अधिनियम के विरोध में लगातार आंदोलन किए जा रहे हैं इस कानून का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है इस कानून को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के मुताबिक लागू कराने के लिए जगह जगह सड़कों पर प्रदर्शन किया जा रहा है पिछले दिनों पटना के डाकबंगला चौराहे पर प्रदर्शन कर रहे भूमिहार ब्राह्मण महासभा के लोगों पर पुलिस ने जमकर लाठियां भांजी। कई प्रदर्शनकारी घायल भी हुए। सवर्णों के आह्वान पर हुए भारत बंद पर कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त किए थे।  बंद का समर्थन करते हुए पटना उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि सवर्णो के द्वारा भारत बंद किया गया था, तो आपको बंद का एक अलग स्वरूप देखने को मिला। उन्होंने कहा कि तथा कथित सामाजिक संगठनों की तरह हुआ होता तो बन्द का समर्थक सवर्ण रह ही नहीं जाते। यह बंद इसलिए भी होना चाहिए था कि सरकार एवं समाज ने जो सवर्ण को कम आंकने की कोशिश की है, तो उन्हें भी समझ में आना चाहिए। सवर्ण वही है जो अगर आरक्षण के लिये जान दे रहे है। लोगों को 99% भी आरक्षण दे दिया जाए, तो भी वो अकेला 1% सब पर भारी पड़ता है। भारत बंद हुआ तो पर राजनीति के लिए नहीं, अपने एकता एवं ताकत को प्रदर्शित करने के लिए। 

उधर, जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ता ने राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे का हल ढूंढने के लिए विचार विमर्श किए जाने की जरूरत बताया है। वहीं राष्ट्रीय जनता दल के मुख्य प्रवक्ता ने भी केंद्र सरकार से सवर्णों के समस्या को सुनकर उसका हल निकालने की मांग किया है। इस मुद्दे पर हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा कुछ भी बोलने से बचते नजर आ रही है। लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने प्रेस बयान जारी कर कहा है कि गरीब सवर्णों को भी 15% आरक्षण दिए जाने चाहिए। 

साथ ही, कांग्रेस प्रवक्ता ने भी गरीब सवर्णों के हितों का ख्याल रखने के लिए केंद्र सरकार से मांग किया है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस शुरू से सवर्णों की पार्टी रही है। सवर्ण आयोग का गठन कांग्रेस के समय में ही किया गया था। यह भी कहा कि कांग्रेस देश के हर समाज की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहा है चाहे वह सवर्ण हो या ओबीसी या फिर एससी-एसटी। 

इसके अलावा युवा राजद के प्रदेश अध्यक्ष ने सवर्ण संगठनों के प्रस्तावित भारत बंद का समर्थन करने से साफ इनकार करते हुए कहा कि ये भाजपा, RSS और बजरंग दल के गुंडे हैं। जो समाज में उन्माद फैलाते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव शुरू से सभी वर्गों के हितों का ख्याल रखते हुए सवर्णों के लिए भी आरक्षण की मांग का समर्थन किया है। उन्होंने सवर्णों के शोषण के मुद्दे पर कहा कि कोई भी सवर्ण शोषित नहीं है। हमारे देश में अगर कोई सबसे ज्यादा शोषित है तो वह एससी-एसटी के लोग ही हैं।

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