सिनेमा और किन्नर समाज: समाज की प्रचलित मान्यताओं को ही अधिकतर सिनेमा में अभिव्यक्ति मिलती है।

समाज की प्रचलित मान्यताओं को ही अधिकतर सिनेमा में अभिव्यक्ति मिलती है। सामाजिक परिप्रेक्ष्यों से अलग हटकर चित्रण मुख्य धारा के हिंदी सिनेमा में गिना चुना ही है। यही बात हिंदी फिल्मों में किन्नर व समलैंगिक समाज के चित्रण के संदर्भ में भी कही जा सकती है। फिल्में समाज का आईना होती हैं। सिनेमा के … Continue reading सिनेमा और किन्नर समाज: समाज की प्रचलित मान्यताओं को ही अधिकतर सिनेमा में अभिव्यक्ति मिलती है।