डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह ‘सहज़’, हरदा, मध्य प्रदेश बाद जाने के तेरे , मैं और बता क्या करता ।अश्क अपने न बहाता तो बता क्या करता ।हर शख़्स अनजबी था मेरा तेरे इस शहर में ।तस्वीर तेरी ये न दिखाता तो बता क्या करता ।कौन है ऐसा जो रखता ज़ख्म पर मेरे मरहम ।चौखट पे … Continue reading हर शख्स अनजबी था,,,
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