मिथिलांचल का डॉन NDA

माता सीता की नगरी और भगवान राम का ससुराल बिहार में मिथिलांचल की 32 सीटें एनडीए के खाते में गई हैं और सिर्फ चार महागठबंधन को मिली हैं। इसके बाद उत्तरी बिहार में कांग्रेस, आरजेडी के लिए जमीन तलाशना मुश्किल हो गया है।

एनडीए की तरफ से पहली बार चुनाव लड़ रहीं मैथिली ठाकुर ने बीजेपी के टिकट पर जीत हासिल की। उन्होंने दरभंगा की अलीनगर सीट पर आरजेडी के बिनोद मिश्रा को 11,730 वोटों से हराया। मैथिली को 84,915 वोट मिले। वहीं, बिनोद मिश्रा को 73,185 वोट मिले। यह उनके राजनीतिक करियर की शानदार शुरुआत थी। इसके अलावा झांझरपुर में नीतीश मिश्रा (बीजेपी), दरभंगा अर्बन में संजय सारावगी (बीजेपी), कल्याणपुर में महेश्वर हजारी (जेडीयू), सीतामढ़ी में सुनील कुमार पिंटू (बीजेपी) और सरायरंजन में विजय कुमार चौधरी (जेडीयू) ने जीत हासिल की। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मिथिलांचल में एनडीए ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। मिथिलांचल में दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, बेगूसराय आदि जिले शामिल हैं। मिथिला क्षेत्र की 37 सीटों में से एनडीए ने ज्यादातर सीटें जीतीं। इससे क्षेत्र में एनडीए का डंका बज गया। इसके उलट, महागठबंधन को सिर्फ 4 सीटों पर जीत मिली। एनडीए की जीत का श्रेय केंद्र सरकार की योजनाओं को दिया गया। दरभंगा-मधुबनी के किसानों के लिए मखाना बोर्ड को इनमें सबसे अहम माना गया। वहीं, महागठबंधन को निराशा ही हाथ लगी। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे उत्तरी बिहार में महागठबंधन की कमजोर हालत को उजागर करते हैं। यहां एनडीए की मजबूत पकड़ के चलते कांग्रेस लगातार हाशिए पर जा रही है। 37 में से 32 सीटें जीतकर महागठबंधन ने यहां अपना दबदबा कायम रखा है। जातिगत समीकरण और विकास के मुद्दों पर यहां वोट बंटते रहे हैं। इस चुनाव के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के लिए वापसी की राह और मुश्किल हो गई है।महागठबंधन को एकमात्र बड़ी जीत समस्तीपुर के उजियारपुर में मिली। यहां आरजेडी के अलोक कुमार ने एनडीए के प्रशांत कुमार पंकज को तीसरी बार हराकर अपनी हैट्रिक पूरी की। वहीं, हारने वाले उम्मीदवारों की सूची काफी लंबी है। हसनपुर (समस्तीपुर) में आरजेडी की माला पुष्पम, जेडीयू के राजकुमार राय से हार गईं। बेगूसराय जैसे इलाकों में एनडीए को चुनौती जरूर मिली, लेकिन महागठबंधन के उम्मीदवार अंतिम नतीजों में कोई छाप नहीं छोड़ पाए।

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