महिला सुरक्षा और उनके हित के लिए कानून में कई प्रावधान हैं जिनके कारण आज के समय में इस तरह के कानून का कुछ लोगों द्वारा गलत इस्तेमाल भी किया जा रहा है। ‘हाय जिंदगी’ सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म में मर्द के दर्द पर बात की गई है। फिल्म की कहानी और कलाकारों का काम कैसा है, जानें।

चार सहेली पलक (गरिमा सिंह), मेघा (आयुषी तिवारी), ज्योति (सोमी श्री) और नंदिनी (दीपांशी त्यागी) के बारे मे है. पार्टी करने, डिस्को जाने और लौंग ड्राईव पर जाने को ही ये जिंदगी मानती हैं। चारों दोस्त एक दिन पलक के पापा के फार्महाउस मे जाने की योजना बनाती है। पलक के डैडी की कंपनी में जॉब करने वाले वरुण (गौरव सिंह) को ये लड़कियां अपने साथ ले जाती हैं। फार्महाउस मे शराब और मस्ती का दौर चलता है। वरूण को गहरे नशे मे चढ़ाकर लड़कियां उसके जिस्म से खेलती है। जब वह बेहोशी से बाहर निकलता है तो पुलिस को जाकर अपने साथ हुई जबर्दस्ती की बात बताता है मगर उसकी शिकायत न लिखकर पुलिसवाले उसपर हंसते हैं। आगे वह क्या करता है, यह आपको फिल्म देखकर पता चलेगा। सिनेमा के क्लाइमैक्स की चर्चा खास तौर पर होनी चाहिए। फिल्म के अंतिम 20 मिनट बहुत पावरफुल है। इसका बड़ा क्रेडिट फिल्म के डायरेक्टर और प्रमुख कलाकारों को जाता है। यही कारण है कि अब पुरुष भी अपनी सुरक्षा के लिए कानून की मांग कर रहे हैं ताकि अगर उनके साथ भी कभी कुछ गलत होता है तो वे पुलिस या अदालत का रुख कर सकें। मौजूदा सोसाईटी के इस कड़वे सच को पेश करती हाय जिंदगी एक बेहद संवेदनशील फिल्म है। कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि अगर आप कुछ अलग कंटेंट देखना चाहते हैं तो निस्संकोच यह फिल्म आपके लिए है. एक अलग तरह का अनुभव यदि आप हासिल करना चाहते हैं तो सिनेमाघरों मे रिलीज यह फिल्म देखने के काबिल है।
