नैतिक भौतिकवाद के माध्यम से चिंता-रहित जीवन और विश्व नवनिर्माण का संकल्प

समाज में बढ़ती असमानता, हिंसा, तनाव, नैतिक पतन और मूल्यहीनता के बीच एक सकारात्मक, व्यवहारिक और प्रभावी वैचारिक पहल के रूप में ‘इंडियन पीस मिशन’ तेजी से अपनी पहचान बना रहा है।

इसी क्रम में 4 जनवरी 2026 को आईपीएम मीडिया हाउस, गांधी नगर में ‘इंडियन पीस मिशन’ के तत्वावधान में एक विचारोत्तेजक, प्रेरणादायी और उद्देश्यपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े वरिष्ठतम बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकतार्ओं, पत्रकारों, शिक्षाविदों, कवियों और विचारकों ने भाग लेकर व्यवस्था परिवर्तन और समाज नवनिर्माण पर गंभीर मंथन किया। ‘इंडियन पीस मिशन’ समाज के उन वरिष्ठतम और अनुभवी लोगों द्वारा गठित एक वैचारिक आंदोलन है, जिसका मूल उद्देश्य ‘चिंता-रहित जीवन सभी को, हर स्तर पर, बिना किसी को हानि पहुँचाए’ को साकार करना है। यह मिशन ‘नैतिक भौतिकवाद’ की अवधारणा पर आधारित है, जिसमें समाजवाद, साम्यवाद, लोकतंत्र और मानवता जैसे मूलभूत लक्ष्यों का समन्वय करते हुए एक वैज्ञानिक, व्यवहारिक, सरल, विधिक और प्रभावी मार्ग प्रस्तुत किया गया है। मिशन का मानना है कि यदि भौतिक विकास के साथ नैतिक मूल्यों को जोड़ा जाए, तो राष्ट्र ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व का नवनिर्माण संभव है।

कार्यक्रम की शुरूआत स्वागत उद्बोधन के साथ हुई। इसके पश्चात मंच से एक-एक कर वक्ताओं ने अपने विचार रखे और समाज को नई दिशा देने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम के संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. रमेश कुमार पासी ने अपने उद्बोधन में ‘नैतिक भौतिकवाद’ की अवधारणा को विस्तार से समझाते हुए कहा कि आज समाज में समस्याओं की जड़ केवल संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि नैतिक चेतना का अभाव है। उन्होंने कहा कि जब तक भौतिक विकास को नैतिक जिम्मेदारी से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक शांति, समानता और संतुलन की स्थापना संभव नहीं है।

डॉ. पासी ने बताया कि इंडियन पीस मिशन किसी राजनीतिक दल या संकीर्ण विचारधारा से जुड़ा आंदोलन नहीं है, बल्कि यह मानवता के व्यापक हित में खड़ा एक सामाजिक मिशन है, जो बिना हिंसा, बिना द्वेष और बिना किसी को नुकसान पहुँचाए व्यवस्था परिवर्तन की बात करता है। उन्होंने युवाओं, महिलाओं और बुद्धिजीवियों से इस मिशन से जुड़ने का आह्वान भी किया।

मिशन के महासचिव डॉ. पुनित धवन ने अपने संबोधन में ‘इंडियन पीस मिशन’ के इतिहास, उसकी वैचारिक पृष्ठभूमि और अब तक की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह मिशन वर्षों की चिंतन-प्रक्रिया और अनुभवों का परिणाम है, जिसमें समाज के हर वर्ग की समस्याओं और संभावनाओं को ध्यान में रखा गया है। डॉ. धवन ने कहा कि नैतिक भौतिकवाद केवल एक सिद्धांत नहीं, बल्कि एक व्यवहारिक मॉडल है, जिसे जीवन के हर क्षेत्र—शिक्षा, राजनीति, अर्थव्यवस्था, मीडिया और सामाजिक जीवन—में लागू किया जा सकता है। उन्होंने मिशन के भविष्य के कार्ययोजनाओं की भी जानकारी दी। कार्यक्रम में संसद टीवी के एडिटर मनोज वर्मा ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि आज समाज को केवल नारों की नहीं, बल्कि ठोस और व्यवहारिक विकल्पों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे वैचारिक मंच समाज को सोचने और आत्ममंथन करने का अवसर देते हैं।

मनोज वर्मा ने मीडिया की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मीडिया यदि सकारात्मक, रचनात्मक और समाधान-आधारित विचारों को स्थान दे, तो समाज में बड़े परिवर्तन संभव हैं। उन्होंने ‘इंडियन पीस मिशन’ जैसी पहलों को समय की आवश्यकता बताया। कार्यक्रम का सबसे प्रभावशाली और झकझोर देने वाला वक्तव्य बाबा विजयेन्द्र जी का रहा। उन्होंने अपने स्पष्ट और बेबाक शब्दों में कहा कि केवल मंचों पर भाषण देने और आयोजनों तक सीमित रहने से समाज में बदलाव नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि असली परिवर्तन तब आएगा जब हर बच्चा, हर जवान, हर महिला और हर बुजुर्ग घर से बाहर निकलकर एक साथ परिवर्तन का आह्वान करेगा। बाबा विजयेन्द्र जी के इस वक्तव्य ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया और एक नई ऊर्जा का संचार किया। मास्टर विजय सिंह जी ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि समाज परिवर्तन की शुरूआत शिक्षा से होती है। यदि बच्चों को बचपन से ही नैतिकता, मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाया जाए, तो आने वाली पीढ़ियाँ स्वत: एक बेहतर समाज का निर्माण करेंगी। उन्होंने ‘इंडियन पीस मिशन’ की सोच को नई पीढ़ी के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।

प्रसिद्ध कवि इकबाल ने अपने काव्यात्मक अंदाज में मिशन के विचारों को शब्दों का रूप देते हुए कहा कि जब विचार सही दिशा में बहते हैं, तो शब्द स्वयं समाज का आईना बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज को केवल विचार नहीं, बल्कि आत्मबल भी देते हैं। डॉ. भजन कौर ने अपने संबोधन में महिलाओं की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज का वास्तविक परिवर्तन तब तक संभव नहीं है, जब तक महिलाओं को बराबरी का स्थान और निर्णय-निर्माण में भागीदारी नहीं दी जाती। उन्होंने ‘इंडियन पीस मिशन’ की समावेशी सोच की सराहना की। वहीं संध्या अग्रवाल ने कहा कि आज का समाज संवादहीनता और असहिष्णुता की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में ‘इंडियन पीस मिशन’ जैसे मंच संवाद, सहअस्तित्व और शांति का रास्ता दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि समाज को जोड़ने का काम ऐसे ही विचारशील आयोजनों से संभव है। कार्यक्रम के मंच का कुशल एवं गरिमामय संचालन वरिष्ठतम गणमान्य डॉ. शेष नारायण वाजपेयी द्वारा किया गया। उनके संयमित और प्रभावी संचालन ने कार्यक्रम को एक अनुशासित और सार्थक दिशा प्रदान की।

कार्यक्रम के दौरान समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अनेक गणमान्य व्यक्तियों को सम्मानित भी किया गया। सम्मानित होने वालों में प्रमुख रूप से शंकर लाल पासी, शिव प्रकाश, डॉ. प्रकाश गेरा, अधिवक्ता वी.के. शर्मा, बाबा विजयेन्द्र, मनोज वर्मा, संजय शर्मा, विजय सिंह, सरिता भाटिया, कल्पना जैन, सुभाष गुप्ता, आर.के. सिंह यादव, सदानंद रावत, ईश्वर सिंह राठौर, गौरव जैन, देवेन्द्र सिंह राजपूत, तीरथ राज, संदीप कुमार, राजेश कुन्दरा, प्रवीण शर्मा, वाणिक जैन सहित अनेक अन्य गणमान्य लोग शामिल रहे। यह सम्मान समाज में सकारात्मक कार्य करने वालों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना।

कार्यक्रम को सफल बनाने में राम किशोर पिंकी, तरुण कुमार निमेष, रश्मि, गीता जॉर्ज, दीपक, सूरज, रीचू सहित पूरी आयोजन टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी ने समन्वय, समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ कार्यक्रम को सफल बनाया। समापन सत्र में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि ‘इंडियन पीस मिशन’ केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि एक निरंतर चलने वाली सामाजिक चेतना है। यह मिशन समाज को सोचने, समझने और संगठित होकर सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान करता है। कार्यक्रम का समापन शांति, सद्भाव और सामाजिक जिम्मेदारी के संकल्प के साथ हुआ।

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