नई सोच के साथ नई दिशाओं पर बल देते हुए सरकार ने आधारभूत संरचना में रिकॉर्ड 11.11 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है। साथ ही, युवाओं के लिए स्किलिंग, इंटर्नशिप और स्टार्टअप्स के माध्यम से रोजगार के अभूतपूर्व अवसर खोले हैं।

रितेश सिन्हा, राजनीतिक विश्लेषक, नई दिल्ली, 1 फरवरी 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा शनिवार को पेश केंद्रीय बजट 2025-26 ने एक बार फिर साबित किया कि मोदी सरकार विकास के पथ पर अडिग है। इसे ‘आम बजट’ कहने का कारण इसका समावेशी चरित्र है, जो गरीबों, किसानों, युवाओं, महिलाओं और मध्यम वर्ग की आकांक्षाओं को समेटे हुए है। नई सोच के साथ नई दिशाओं पर बल देते हुए सरकार ने आधारभूत संरचना में रिकॉर्ड 11.11 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है। साथ ही, युवाओं के लिए स्किलिंग, इंटर्नशिप और स्टार्टअप्स के माध्यम से रोजगार के अभूतपूर्व अवसर खोले हैं।
यह बजट न केवल आर्थिक स्थिरता को मजबूत करता है, बल्कि ‘विकसित भारत@2047’ के सपने को वास्तविकता की ओर ले जाता है। आंकड़ों से स्पष्ट है कि जीडीपी वृद्धि दर को 8 प्रतिशत पर स्थिर रखने का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए यह एक मजबूत नींव है।
आधारभूत संरचना: विकास का मजबूत इंजन
बजट का सबसे चमकदार पहलू आधारभूत संरचना पर केंद्रित है। पूंजीगत व्यय को 11.11 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाया गया है, जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.4 प्रतिशत है। राष्ट्रीय आधारभूत संरचना पाइपलाइन (एनआईपी) के तहत 2020 से अब तक 115 लाख करोड़ रुपये के 2,000 से अधिक प्रोजेक्ट्स स्वीकृत हो चुके हैं।
2025-26 में 30 लाख करोड़ रुपये के नए कार्यों की शुरुआत होगी। विशेष रूप से, चार नई मेगा कॉरिडोर परियोजनाओं—विशाखापट्टनम से चेन्नई, जम्मू से लेह, गुवाहाटी से सिक्किम और कोलकाता से अंडमान—पर तेजी से काम शुरू होगा। ये कॉरिडोर न केवल व्यापार को गति देंगे, बल्कि पूर्वोत्तर और तटीय क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ेंगे।’असेट मोनेटाइजेशन प्लान 2.0′ की शुरुआत से 10 लाख करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे, जो नई परियोजनाओं के लिए पूंजी उपलब्ध कराएगा। इससे लॉजिस्टिक्स लागत 7-8 प्रतिशत घटकर 10 प्रतिशत से नीचे आ जाएगी, जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
शहरी चैलेंज फंड के 1 लाख करोड़ रुपये से 100 शहरों को ग्रोथ हब में बदला जाएगा। जल जीवन मिशन के तहत 15 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल जल मिल चुका है, और अब शहरी क्षेत्रों में भी विस्तार होगा। बिहार और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में रेल-रोड कनेक्टिविटी मजबूत करने से क्षेत्रीय असंतुलन दूर होगा। इन परियोजनाओं से अगले पांच वर्षों में 2 करोड़ सीधी नौकरियां सृजित होंगी। यह नीति लंबी अवधि की आर्थिक वृद्धि को 8-9 प्रतिशत पर टिकाए रखने का आधार तैयार करती है।
युवा सशक्तिकरण: रोजगार और स्किल्स के नए द्वार
युवाओं को समर्पित घोषणाएं इस बजट की जान हैं। ‘स्किल इंडिया 2.0’ के तहत अगले पांच वर्षों में 5 करोड़ युवाओं को उन्नत ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिए 1,000 आईटीआई और 500 पॉलिटेक्निक संस्थानों को आधुनिक बनाया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण ‘युवा इंटर्नशिप योजना’ से 1 करोड़ युवाओं को 12 महीने की इंटर्नशिप मिलेगी। इसमें प्रति माह 5,000 रुपये भत्ता और एकमुश्त 6 लाख रुपये का कैपिटल इनसेंटिव मिलेगा। इससे कॉर्पोरेट क्षेत्र की 500 शीर्ष कंपनियां जुड़ेंगी, जो युवाओं को व्यावहारिक अनुभव देंगी।स्टार्टअप इंडिया के लिए क्रेडिट गारंटी कवर को 20 करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया है, जिससे 1 लाख नए स्टार्टअप्स उभरेंगे। डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने हेतु ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल बनेगा, और स्पेस सेक्टर में निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। बिहार जैसे युवा-बहुल राज्य, जहां 60 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है, इस योजना से सबसे अधिक लाभान्वित होंगे। छत्तीसगढ़ में औद्योगिक स्किल हब स्थापित होंगे। इन कदमों से बेरोजगारी दर 4 प्रतिशत से नीचे लाई जाएगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ को वास्तविक लाभांश में बदल देगा। युवा उद्यमिता को बढ़ावा देकर सरकार ने नई पीढ़ी को आत्मनिर्भर बनाया है।
किसानों की उपेक्षा न करते हुए बजट में कई लक्षित योजनाएं हैं। ‘मिशन फॉर कॉटन प्रोडक्टिविटी’ से अगले पांच वर्षों में कपास उत्पादन दोगुना हो जाएगा। दालें, तिलहन और मक्का के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 1.52 लाख करोड़ रुपये की खरीद का लक्ष्य रखा गया। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 1 करोड़ किसानों को जोड़ा जाएगा, जबकि फसल विविधीकरण और माइक्रो सिंचाई पर विशेष जोर। पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में ‘स्वच्छ दूध योजना’ शुरू होगी, फिशरीज के लिए 3.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा।ग्रामीण आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत 2 करोड़ अतिरिक्त घर बनेंगे। बिहार के गंगा मैदानी इलाकों में सिंचाई सुविधाएं बढ़ेंगी, जबकि छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में जैविक खेती को प्राथमिकता मिलेगी। ये कदम किसानों की आय दोगुनी करने के 2022 के संकल्प को साकार करेंगे। महाराष्ट्र जैसे राज्यों में मशीनीकरण को बढ़ावा देकर उत्पादकता में वृद्धि होगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होने से समग्र विकास संभव है।सामाजिक कल्याण: गरीबी उन्मूलन की नई गतिसामाजिक न्याय पर फोकस करते हुए ‘सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0’ से 8 करोड़ बच्चों और 1 करोड़ गर्भवती महिलाओं को पोषण मिलेगा। जनजातीय क्षेत्रों के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये का विशेष पैकेज घोषित हुआ। आयुष्मान भारत योजना का विस्तार मध्यम वर्ग तक होगा, जिसमें 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर मिलेगा। महिलाओं के लिए ‘लाखपति दीदी’ योजना को 3 करोड़ तक ले जाया जाएगा, जो स्वरोजगार को बढ़ावा देगी। इन योजनाओं से गरीबी रेखा से नीचे जीवन जीने वालों की संख्या और घटी.
बजट अनुमान 2025-26: कुल प्राप्तियां 34.96 लाख करोड़ रुपये, व्यय 50.65 लाख करोड़ रुपये। राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.4 प्रतिशत। कर प्राप्ति 28.37 लाख करोड़ रुपये अनुमानित। जीएसटी संग्रह में 12 प्रतिशत वृद्धि से राजस्व मजबूत। मुद्रास्फीति नियंत्रण में, विकास दर 8 प्रतिशत का अनुमान। वैश्विक मंदी के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था सबसे तेज बढ़ने वाली रहेगी।चुनौतियां और सुझावहालांकि बजट सराहनीय है, कार्यान्वयन में पारदर्शिता जरूरी। विपक्ष ने इसे ‘चुनावी बजट’ कहा, लेकिन आंकड़े समावेशी विकास दर्शाते हैं। मध्यम वर्ग को टैक्स राहत की कमी पर सवाल उठे, लेकिन दीर्घकालिक लाभ स्पष्ट हैं। बिहार-महाराष्ट्र जैसे चुनावी राज्यों को विशेष पैकेज से राजनीतिक संतुलन बना।
यह बजट नई सोच का प्रतीक है—लोकलुभावन से हटकर रणनीतिक विकास पर फोकस। आधारभूत संरचना युवा शक्ति को सशक्त बनाएगी, कृषि-सामाजिक योजनाएं सबको जोड़ेंगी। भारत 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से अग्रसर। सरकार का विजन ‘सबका साथ, सबका विकास’ अब मूर्त हो रहा है। संसद में चर्चा से ये नीतियां और मजबूत होंगी।