बिहार के राजनीति का सुबह या शाम

महान दार्शनिक अरस्तु के शब्दों में “मानवीय जीवन की सर्वोच्च उपलब्धि राजनीति में विराजमान है“-प्रो अनिल कुमार चौधरी

महान दार्शनिक अरस्तु के शब्दों में “मानवीय जीवन की सर्वोच्च उपलब्धि राजनीति में विराजमान है“ कि सर्वाधिक उर्वर भूमि बिहार, चाणक्य राजनीति के बेमिसाल सूत्रों की जन्मदाता तथा निर्यातक रही है। स्वतंत्रता प्राप्तोपरांत बिहार केसरी डॉ श्रीकृष्ण सिंह से लेकर बिहार विभूति डॉक्टर अनुग्रह नारायण सिंहा सरीखे बेमिसाल बिहार विश्वकर्मा राजनेता व्यक्तित्वों की महान सूत्रों के प्रति  अकाट्य प्रतिबद्धता ने ऐतिहासिक चिरस्मरणीयता हासिल  की है। 1970दशक का सर्वाधिक व्यवस्थित राज्य बिहार विदेशी पत्रकारों, लेखकों तक की प्रशंसा का विषय रहा है जिसका सर्वाधिक श्रेय उपर्युक्त महान विभूतियों को जाता है। निसंदेह, बिहार केसरी डॉ श्रीकृष्ण सिंह का व्यक्तित्व पंडित जवाहर लाल नेहरू तक को कायल बनाने में सक्षम रहा है फलस्वरूप दामोदर वैली कारपोरेशन से लेकर समस्तीपुर ,मुजफ्फरपुर रेल तथा बरौनी, सिंदरी जैसे अनेकानेक उद्योगों की आधारशिला तत्कालीन बिहार में साकार हो सकी तो जमींदारी उन्मूलन सरीखे भूमिसुधार कार्यकमों ने बिहार को नई दिशा दिया। वर्तमान बिहार के  राजनीतिक अभीशापों की कारगुजारीयों का शिकार  बिहार सदैव उन महान विभूतियों का ऋणी है । बिहार केसरी तथा बिहार विभूति कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता रुपी मुख्यमंत्री पद की दावेदारी बिहार विकास के समक्ष कभी चुनौती पेश नहीं कर सकी। महान विभूतियों की परस्पर राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता मुख्यमंत्री पद की घोषणा के साथ ही समाप्त होकर बिहार विकास के प्रति समर्पित होती थीं। तत्कालीन बिहार राजनीतिक किरदारों ने सर्वश्रेष्ठ व्यवस्थित राज्य की अक्षुण्णता जीवनपर्यंत बरकरार रखी। परिवारवाद से दूर का बिहार केसरी व्यक्तित्व का कालांतर का बिहार राजनीतिक अस्थिरता का शिकार रहा। तत्कालीन अनगिनत राजनीतिक किरदारों से ग्रसित  बिहार ने जेपी आंदोलन के तहत 1977 के बाद लालू प्रसाद यादव की विधायिका में अनवरतता सुनिश्चित की जिनके परिवारवाद के नए आयामों ने राजनीतिक अभिशापों को सजने संवरने हेतु संरक्षण प्रदान किया। ऐसे अभिशाप बिहार ही नहीं वरन संपूर्ण भारतवर्ष के लिए विस्मयकारी हैं। जेपी आंदोलन उत्पादित व्यक्तित्वों से आच्छादित 1980 दशक में अनेकानेक अभिशापों की बहुलता का बिहार निरंतर अपने पुरातन इतिहास के दर्ज रिकार्डों से दूर होने की व्यथा बयान करता रहा है। लालू बिहारी सरीखे नए विशेषणों के संबोधन के शिकार प्रदेशवासी जेपी आंदोलन के महान उत्पादन की ऐसी उपलब्धि प्रशासन से लेकर बिहार विकास के सभी मानकों में दृष्टिगत रहे है। दुर्भाग्यवश, जेपी आंदोलन उत्पादित रविशंकर प्रसाद, सुशील मोदी के लंबे बरसो कि राजनीतिक उपस्थिति भी परिवार से बाहर के बिहार के लिए नई उर्जा देने में नाकाम रही है तो  बिहार राजनीति के जेपी आंदोलन उत्पादित अभिशापों से इतर का 1980 दशक के अनेकानेक उत्पादन भी वर्तमान बिहार के लिए अभिशाप बन चुके हैं। ऐसे अनगिनत अभिशापों  में डॉक्टर महाचंद्र प्रसाद सिंह, प्रभुनाथ सिंह के कृतित्व से सारण की धरती का पिछड़ापन, गिरिराज सिंह के बड़हिया प्रशासन की अव्यवस्था, अनंत सिंह कि मोकामा की हतोत्साहित धरती, सूरजभान सिंह कि मुंगेर की  अनुत्पादकता, रामविलास पासवान कि मौसम विज्ञानी क्षमता का पारिवारिक लाभ रामचंद्र पासवान, जीतन राम मांझी का गंभीर अकृतज्ञ व्यक्तित्व, उपेन्द्र कुशवाहा की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा, पप्पू यादव की कारगुज़ारी रूपी अनगिनत राजनीतिक महारथी आधुनिक बिहार के सर्वश्रेष्ठ अभिशाप बन चुके हैं। बेशक, उच्च शिक्षा प्राप्त गिरिराज , रविशंकर प्रसाद,महाचंद्र प्रसाद,रामविलास, उपेन्द्र कुशवाहा का बिहार अभिशापों में सुरक्षित स्थान आधुनिक बिहार के लिए गंभीर चिंता का विषय है कि लंबे वर्षों तक सत्ता की चाबी लेकर भ्रमणशील इन व्यक्तित्वों ने क्या कुछ बिहार समाज के लिए किया है? क्या 36 वर्षों का महाचंद्र सारण  राजनीतिक जीवन, रविशंकर प्रसाद का पहले भाजपा मंत्री पद, रामविलास का सभी सरकारों का मंत्री पद बिहार वासियों के लिए सार्थक रहा है या परिवारवाद की होली खेलने में मशगूल रहा है?

आधुनिक बिहार में परिवारवाद की होली के महान राजनीतिज्ञों लालू, रविशंकर, महाचंद्र, सुशील मोदी, रामविलास पासवान, मांझी ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है तो हत्याओं, अपहरणकर्ताओं लुटेरों के जन्मदाता, समर्थक प्रभुनाथ सिंह,अनंत सिंह,मुन्ना शुक्ला,पप्पू यादव सरीखे राजनीतिक गलियारों के भ्रमणशील व्यक्तित्व भी बिहार राजनीति के अभिशाप हैं जिन्हें सुशिक्षित अभिशापों से कमतर नहीं माना जा सकता है। यह गौरतलब है कि सुशील मोदी, गिरिराज लंबे बरसों तक बिहार  विधायिका के सदस्य रहे हैं परंतु बिहार निर्माण में उनका योगदान  कदाचित बिहारवासीयों के लिए परिवारवाद की होली की कहानी ही रही  हैं। सौभाग्यवश, जे.पी. आंदोलन के सर्वश्रेष्ठ उत्पादन इलेक्ट्रिकल इंजीनियर नीतीश कुमार का 1985 से बिहार विधायिका की यात्रा पुरातन विश्वकर्मा बिहार केसरी तथा बिहार विभूति की धरती को आधुनिक विश्वकर्मा का नया अवतार मिला है। सन् 2010 से अब तक के बिहार में अनगिनत व्याकुल आत्माओं को भवसागर से पार कराते हुए बिहार विकास की धारा को पटरी पर दौड़ाने हेतु नीतीश कुमार प्रयासरत रहे हैं। महाचंद्र,प्रभुनाथ,अनंत,मुन्ना शुक्ला,पप्पू यादव,जीतनराम मांझी,रामविलास पासवान,रामचंद्र पासवान,उपेन्द्र कुशवाहा सरीखे बिहार राजनीतिक अभिशापों की विधायिका  प्रजाति का वर्तमान बिहार सुशासन बाबू के लिए भी गंभीर चुनौती है। ऐसा कहा जा सकता है कि नीतीश कुमार को लालू, महाचंद्र रुपी बिहार राजनीतिक अभिशापों के उन्मूलन के साथ साथ  बिहार केसरी जैसे दर्शनों को केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत करना होगा ताकि अपने 60 महीनों के वादों को मोदी अमलीजामा पहनाने हेतु विवश हो सकें।

ऐसी सामयिकता का बिहार राजनीतिक परिदृश्य के एकमात्र आशा की किरण नीतीश कुमार हैं तो पुरातन बिहार विश्वकर्मा बिहार केसरी की वर्तमान पीढ़ी के निशांत कुमार की इन दिनों राजनीतिक गलियारों की खबर आशा की किरण साबित हो सकते हैं। खबरों के मुताबिक नीतीश जी ने अपने बेटे निशांत कुमार को बिहार की ऐक्टिव राजनीति का सिरमौर बनाने को सोंच लिया है । बिहार राजनीतिक इतिहास के इस प्रथम परिवार के सुयोग्य वारिस निशांत कुमार की रजामंदी सम्पूर्ण बिहार के लिए खास खबर हो सकती है। वर्तमान विश्वकर्मा नीतीश कुमार  को डबल इंजन के अपने विधानसभा वादों, घोषणाओं की सार्थकता साबित करने हेतु बिहार अभिशापों का उन्मूलन अवश्यंभावी माना जाना चाहिए तथा उच्च जीवन दर्शन के व्यक्तित्वों को बिहार राजनीति का सिपाही बनाने की आवश्यकता है क्योंकि महान अनगिनत राजनीतिक अभिशापों की परिवारवादी चिंतन सम्पूर्ण बिहार के संसाधनों को निगलने में सक्षम है। संभवतः वर्तमान बिहार विश्वकर्मा नीतीश कुमार की डबल इंजन थ्योरी से प्राप्त संसाधन भी ऐसे महान बिहार अभिशापों की नेवाला बनकर बिहार विकास  के समक्ष चुनौती बन सकतीे हैं। निसंदेह, नीतीश का इस संदर्भ में निशांत कुमार का स्थापना मिल का पत्थर साबित हो सकता है। बहरहाल, ऐसे अनगिनत अभिशापों का उन्मूलन करके ही बिहार विकास की गारंटी पायी जा सकती है। संभवतः नीतीश कुमार का दर्शन आने वाले दिनों में तमाम बिहार राजनीतिक अभिशापों के सफाया हेतु व्यापक स्तर पर अभियान चलाने की बिहार को अपेक्षित हो सकती है।

Change Language