आपदा अवसर नियति क्यों

हसरत न कभी लंबा जीने की रही, न वैभव का सम्राज्य खड़ा करने की। यही चाह रही कि जितनी जिन्दगी जी कर कूच करे इस दुनिया को, इस धरती को खूबसूरत होता देखता रहें।

मिडिल ईस्ट जंग के बीच जब भी, जहां से भी गैस सिलेंडर मिलने की खबर आतीं, मन को सुकून मिलता और हम आपके साथ खुशियां बांटते के लिए खबर बना रहे हैं , मजाक की बात है पर मीडिया मार्ट इंडिया , ने सदा प्रयास किया कि आने वाली पीढ़ियां वाकई इंसानियत से भरी पूरी रहे। हमारा सदा कोशिश रहा है और रहेगा एक ऐसा समाज बनाने का जहां या तो इंसानों के बीच कोई भेदभाव नहीं हो, और अगर विभिन्नता हो भी तो वह एक दूसरे के लिए नफरत का बायस नहीं बने, जो एक मीडिया हाउस का फर्ज भी होता है। आज जब कुछ मीडिया हाउस खुद की श्रेष्ठता के आगे हर किसी को बौना साबित करने की कोशिश में ही लगा रहता है।

मेरी कमीज तेरी कमीज से ज्यादा सफेद बहुत सुना है। हम अच्छे, तुम बुरे का रोग भी देखते रहे हैं। इन सब में हमनें यही पाया है कि सब भूल भुलैया है। सच पूछिए तो सिवाय बर्बादी के इन सबमें कुछ रखा नहीं है। हां, कुछ अर्सों के लिए इन सबसे कुछ लोगों का फायदा होता रहा है, लेकिन वह भी चिरस्थाई नहीं रहा। सत्ता, ताकत क्या हमेशा रह पाई है किसी के पास? पागलपन है यह सब। मुगलों ने सोचा होगा कि इतने सालों बाद उनका नामोनिशान न रहेगा? किसी को मालूम भी है कि अकबर, शाहजहां की असली संतानें कहां हैं, हैं भी कि नहीं? अंग्रेजों ने सोचा था कि सैकड़ों साल राज करने के बाद भी उन्हें बोरिया बिस्तर बांधना पड़ेगा? कोई धर्म, कोई जाति या कोई देश इस बात की गारंटी है कि उसमें कुछ बुरा नहीं होगा? सब के साथ अच्छा बुरा है। कोई किसी दौर में अच्छा तो किसी दौर में बुरा। और इसके लिए कारण एक ही, इंसानियत से विमुख होना। मनुष्य ने मनुष्यता छोड़ जहां चीजें हासिल करने की कोशिश की, उसका परिणाम नुकसानदेह ही होता आया है।

इन दिनों भी कई लोगों और राजनेताओं में ये पागलपन देख रहा हूं। नफरत का जहर समाज में बढ़ते देख रहा हूं। हर कोई अपने पक्ष में इतिहास के टुकड़े बटोर रहा है, भाषणवाजी और वीडियो क्लीपिंग के सहारे खुद को दूसरे के मुकाबले सही साबित करने की कोशिश में जुटा है। लेकिन इस प्रयास में इंसान के बीच दूरियां बढ़ा रहा है। मीडिया मार्ट इंडिया का मानना है कि जो दिल में आता है, करो मगर इंसान को इंसान के खून का प्यासा मत बनाओ। इतना निष्ठुर समाज मत बनने दो कि किसी की निर्मम अहित कर भी जश्न मनाए इंसान। यह याद रखें कि इंसानियत का विकल्प कुछ नहीं है। कम से कम नफरत और हिंसा तो बिल्कुल नहीं। राजनीतिक पार्टियों का समर्थन विरोध करते इंसान से हैवान न बन जाएं लोग। बड़ा कष्ट होता है देखकर। दंगे को करीब से हमनें कवर किया है और देखा है। नफरत क्या चीज होती है और उससे उपजी हिंसा कहां ले जाती है इंसान को?

प्रेम और भाईचारे की बात करें, न कर सकें तो न करें मगर नफरत की बात भी न करें। खासकर किसी पार्टी या नेता का समर्थन और विरोध करते वक्त ख्याल रखें कि कहीं जाने अनजाने आप नफरत तो नहीं फैला रहे हैं! कहीं समाज में हिंसा का मार्ग तो नहीं प्रशस्त कर रहे हैं! मीडिया मार्ट इंडिया , हमेशा की तरह आज फिर वही बात कहेगा और जब तक है कहता रहेगा। इंसानियत से बढ़कर कुछ नहीं है। प्यार से अनमोल कोई चीज नहीं है। इस दुनिया में अच्छे लोग ही ज्यादा हैं बुरे कम। बस देखने की नजर होनी चाहिए। एक नजरिया होना चाहिए, जहां इंसानियत को ऊपर रखकर चीजें देखी जाएं। हां, यह जरूर होता है कि बुराई कुछ देर के लिए अपना तांडव दिखा जाती है। अच्छाई को लील जाती है। लेकिन यकीन मानिए, फिर भी अच्छाई जिंदा रहती है। अच्छे लोग बने रहेंगे। दुनिया को अच्छा बनाने के लिए। मीडिया मार्ट इंडिया, जानता है कि अच्छी दुनिया और अच्छे लोगों में मत भिन्नता भी होगी, लेकिन नफरत नहीं होगा। हिंसा नहीं होगी। मारने काटने का ख्याल नहीं होगा। कानून पे भरोसा होगा कि गलत करने का दण्ड गलती करने वाले को मिलेगा। जहां सब अपनी अपनी जिम्मेदारियों के साथ न्याय करेंगे। मीडिया मार्ट इंडिया, पत्रकारों का समुह, नागरिक, इंसान होने के नाते यही जिम्मेदारी निभाना मुनासिब समझता है। मीडिया मार्ट इंडिया,  जानता है कि गलत करने वालों का अंजाम अंततः बुरा ही होता है, चाहे वह बुरे से बचने का लाख जतन कर ले। बुराई से बचें, यही संदेश है हम सब के लिए। इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है और ईश्वर, अल्लाह, गॉड सभी उनकी ही रक्षा करते हैं, जो इंसानियत की राह पर चलते हैं। हमारा राजनीति अगर इतनी संवेदनशील होती तो आज देश, समाज की तस्वीर कुछ और होती। आपके लिए भी संकेत, धैर्य रखें। आपका भी टाइम आएगा। या कहें अच्छा दिन आएगा। अपना टाइम आएगा-फिलहाल यह गुनगुना सकते हैं। आपदा में ही अवसर मिलते हैं। नहीं यकीन, तो आजू बाजू देखिए। आपदा में ही अवसर ढूंढ रहे हैं लोग।

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