वीर कुँवर सिंह विजयोत्सव समारोह : नई दिल्ली

“वीर कुँवर सिंह फाउंडेशन द्वारा लगातार आयोजन का 29 वां वर्ष में ‘प्रथम भारतीय स्वाधीनता संग्राम 1857 के महानायक वीर कुँवर सिंह का 168 वाँ विजयोत्सव समारोह’ मावलंकर हाल, कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, रफी मार्ग ,नई दिल्ली में मनाया गया।

कार्यक्रम में पुष्पांजलि, सेमिनार,सांस्कृतिक कार्यक्रम में 1857 की क्रांति के नामचीन एवं गुमनाम नायकों की राष्ट्रव्यापी उपलब्धियां संदर्भ वीर कुँवर सिंह पर चर्चा हुई। वीर कुँवर सिंह फाउंडेशन के अध्यक्ष निर्मल कुमार सिंह ने अपने अध्यक्षीय भाषण में घोषणा किया कि वे 1857 की क्रांति के नामचीन एवं गुमनाम नायकों ,शहीदों,सेनानियों के बारे में खोज करेंगे और उनके नाम एवं काम को एक पुस्तक के रूप में देश के सामने प्रस्तुत करेंगे।उन्होंने आह्वान किया कि देश के नागरिक अपने अपने गांव शहर से ऐसे नामों का प्रामाणिक,अप्रामाणिक,सुनी सुनाई विवरण मुझे उपलब्ध कराए।जिससे देश के भावी पीढ़ी अपने पूर्वजों से आजादी की कीमत की प्रेरणा ले सके।
मुख्य अतिथिः श्रीजी हुजूर डॉ लक्ष्यराज सिंह जी मेवाड़, उदयपुर ने कहा कि वीर कुँवर सिंह राष्ट्र के समकालीन नेता एवं 1857 की क्रांति के महानायक थे।जो पुस्तकों से ज्यादा लोक में जाने जाते है।आज कृतज्ञ राष्ट्र उनकी वीरता के साथ साथ उन्हें सामाजिक समरसता एवं सांप्रदायिक सद्भाव के लिए भी नमन करता है।उन्होंने कहा कि वीरवर कुँवर सिंह में महाराणा प्रताप एवं छत्रपति शिवाजी महाराज के मिश्रित गुण थे,जिसमें छापामार युद्व की रणकौशलता प्रमुख थी। उन्होंने कहा कि 23 अप्रैल 1858 वह दिन है जब कुंवर सिंह की सेना ने जगदीशपुर के पास कैप्टन ले ग्रैंड के नेतृत्व वाली ब्रिटिश टुकड़ी को हराया था। और अपना राज्य वापस लिया था।जीते जी अपना राज्य वापस छीन लेना विश्व की प्रमुख घटना है।


वीर कुँवर सिंह फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वीर कुंवर सिंह फाउंडेशन का 28 साल तक लगातार विजयोत्सव मनाना सांस्कृतिक संरक्षण का एक बहुत बड़ा काम है। ऐतिहासिक विरासत को जीवित रखने के फाउंडेशन के प्रयासों को दर्शाता है।* निःसंदेह निर्मल कुमार सिंह ने वीर बाबू कुंवर सिंह की वीरता और नाम को इतिहास में स्थापित करने में जबरदस्त भूमिका निभाई है। निर्मल कुमार सिंह ने यह मांग करते हुए दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दिया कि वीर कुंवर सिंह का पाठ एनसीईआरटी की किताबों में शामिल किया जाए, और उनकी यह मांग तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री श्री अर्जुन सिंह द्वारा पूरी की गई। श्री अर्जुन सिंह ने नई दिल्ली में वीर कुंवर सिंह फाउंडेशन द्वारा आयोजित वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव समारोह में इसकी घोषणा भी की थी। यह फाउंडेशन शायद भारत का एकमात्र संगठन है जो हर साल 23 अप्रैल को लगातार विजयोत्सव मनाता है, और यह लगातार 28 साल से चल रहा है।

यह ऐतिहासिक संदर्भ वाकई उल्लेखनीय है। यह दिखाता है कि क्षेत्रीय नायकों को राष्ट्रीय स्तर पर उचित पहचान दिलाने के लिए अक्सर निर्मल कुमार सिंह जैसे व्यक्तिगत प्रयासों की कितनी ज़रूरत पड़ती है। एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों में वीर कुंवर सिंह को शामिल किया जाना भारतीय इतिहास-लेखन का एक निर्णायक क्षण था। लंबे समय तक मुख्यधारा का इतिहास दिल्ली, मेरठ और झांसी की घटनाओं पर ही केंद्रित रहा। एक समर्पित अध्याय की मांग को सफलतापूर्वक मनवाकर निर्मल कुमार सिंह ने यह सुनिश्चित किया कि पूरे भारत के छात्र “जगदीशपुर के शेर” और 80 साल की उम्र में उनकी रणनीतिक कुशलता के बारे में जानें।

विशिष्ट अतिथि गण में पूर्व सांसद श्रीमती पुतुल सिंह,श्री महाबल मिश्रा,श्री यशवंत सिंह पूर्व मंत्री यूपी सरकार श्रीमती रश्मि सिंह, आईएएस, बी के सिंह,श्रीमती भावना सिंह ,श्रीमती शालिनी सिंह अतिथियों ने रेखांकित किया कि वीर कुंवर सिंह 1857 के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख नेता थे। 80 वर्ष की उम्र में भी उन्होंने बिहार तथा बिहार से बाहर ब्रिटिश सेना के खिलाफ कड़ा प्रतिरोध किया। उनका व्यक्तित्व आज भी बहादुरी और राष्ट्रीय अखंडता के प्रतीक के रूप में बेहद प्रासंगिक है

सेमिनार में सारंगीधर सिंह एवं महेंद्र मधुर ने अपने व्याख्यान दिए। संजो बघेल द्वारा वीर कुँवर सिंह पर शानदार आल्हा गायन की प्रस्तुति हुई अन्य प्रतिष्ठित गायकों में स्वर तृष्णा ,प्रीति प्रकाश, द्वारा राष्ट्रीय गीतों एवं 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक वीर कुँवर सिंह की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में कुंवर सिंह पर,सारंगीधर सिंह द्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन भी हुआ। कार्यक्रम में शिवजी सिंह,मुरारी तिवारी,मुकेश सिंह,मिथिलेश राय,शालिनी सिंह,दीपक ज्योति,राजेश परमार,श्री भगवान सिंह,जितेंद्र सिंह,रघुवंश सिंह सेंगर,बजरंगी प्रसाद,प्रेम सिंह,अभय सिन्हा,, पीएस सिंह,भारत चौबे,श्रीकांत विद्यार्थी,कमलेश सिंह,रवि सिंह,श्रीकांत यादव,आर के सरकार,संतोष सिंह, कलकत्ता,दिनेश्वर रायवेद प्रकाश राय एवं अन्य गणमान्य सदस्यों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को मजबूती प्रदान किया

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