संघर्षशील , मेहनती , चेतना पर कंट्रोल , जन – जन के प्रति समान भाव रखना , प्रगति की सोंच , सुखमय माहौल ,जितने की चाहत और समर्पण एक जननायक में हर कोई सोंचता और देखता है । सत्ता पाना और सत्ता को सुशोभित होना दोनों अलग – अलग बातें हैं । इन सभी बातों को खुद में समाहित करने वाला ही असली नायक होता है ।

शहीद दिवस 30 जनवरी 1948 तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस 17 सितंबर 1950 के मध्यांतर 2 वर्ष 7 महीने 17 दिन की समयावधि परा वैज्ञानिकों के लिए अन्वेषण की विषय वस्तु हो सकती है। बेशक, नोट बंदी से लेकर जीएसटी और पेट्रोल बंदी सदृश्य अनेक जरूरी और गैर जरूरी निर्णय के चलन और समापन महीनों में अल्पसंख्यक विश्वविद्यालयों की घोषणा की तुष्टीकरण नीति, स्वेच्छाचारी हरिजन एक्ट जाति आधारित राजनीति प्रतीकात्मक तौर पर स्पष्ट करते हैं कि भारतवर्ष की समस्याओं का समाधान जाति धर्म तथा तुष्टीकरण आधारित नीतियां नहीं हो सकती है। पुरातन भारत के जाति आधारित युद्ध मैदान तथा प्रेरणा केन्द्र मंदिरों की भेदभाव पूर्ण नीतियों ने 1000 वर्षों तक भारतवर्ष को गुलाम बनाने में सक्षम रहा है। वर्तमान भारत वर्ष की भेदभाव पूर्ण, शोषणकारी नीतियां नई चुनौतियों का संकेत करती हैं जिसे समझने तथा तदनुरूप कार्य शैली का राजनेता व्यक्तित्व ही वास्तविक राष्ट्र नायक हो सकता है। विविधताओं से परिपूर्ण भारतवर्ष की धरती के लिए किसी विशेष मॉडल की परिकल्पना सार्थक नहीं हो सकती है।

बेशक, दून से हावर्ड विश्वविद्यालय तक की शिक्षा का यात्रा कर चुके राहुल गांधी ऐसे महान नेहरू इंदिरा विरासत के कांग्रेस संगठन की शक्ति किसी भी परिणाम की प्राप्ति नेतृत्व प्रदान कर ऐतिहासिक हो सकते हैं। संघे शक्ति कलियुगे की अवधारणा कांग्रेस संगठन के लिए संजीवनी है जिसके तहत कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों की शक्ति का सदुपयोग राष्ट्र निर्माण में अहम हो सकता है जिसकी फलीभूतता आज राहुल के नेतृत्व कौशल, सलाहकार परिषद पर देश भरोसा करता दिख रहा है । नए सिरे से कॉंग्रेस का गठन पर चिंतन, सलाहकार परिषद में राष्ट्र सर्वोपरि की प्रतिबद्धता आज राहुल को देश नायक सरीखा ही देख रहा है। पेशेवर राजनीतिज्ञों का समावेश, आकांक्षा की गूंज आज राहुल गांधी के इर्दगिर्द दिख रहा है । कार्यकर्ता आकांक्षा, नेतृत्व पर विश्वास, संभवतः महान विरासत को दरबारी संस्कृति से बाहर निकल कर कार्यकर्ताओं से सीधे जुड़ने की तन्मयता सफल होती दिख रही है । बेशक, राहुल गांधी महान विरासत की परंपरा का पालन कर राष्ट्र नायक के जयकारे की गूंज सुन सकते हैं। संभवत, उनका इस संदर्भ में निरंतर प्रयास आगामी दिनों में चमत्कारिक हो सकते हैं बावजूद इसके राष्ट्र नायक के जयकारे हेतु उन्हें गंभीर अनवरत प्रयास करने रहने होंगे। बहरहाल, 21 वी शताब्दी के नूतन भारत वर्ष की राष्ट्रीय आकांक्षा को पूर्ण करने वाला चाणक्य राजनीति का पेशेवर खिलाड़ी राष्ट्र नायक हो सकता है।

बात है आजकी पेपर चोरी, वोट चोरी, सांप्रदायिक मुद्दों, महँगाई और बेरोज़गारी पर युवाओँ का कॉकरोच रिएक्शन दिख रहा है। महज कुछ ही घंटों में एक व्यक्ति का छोटा प्रयास दुनियाँ के सबसे बड़ी पार्टी से भी ज्यादा समर्थक प्राप्त कर लेना लेकिन इसी आधार पर उन्हें अपनी बात कहने से रोका नहीं जा सकता है। कॉकरोच जनता पार्टी के पीछे कौन है, क्या है इसे लेकर निगेटिव होने से अच्छा है कि सरकार और विपक्ष दोनों ही समझे कि जनता का युवा तबका उसके बारे में क्यों नहीं सोच रहा है। शायद इसी से आप सत्ता का नायक और खलनायक का चुनाव कर पाते होंगे पर कॉकरोच जनता पार्टी को देश के युवाओं की आवाज मानकर सत्तानशीनों और विपक्ष को देश की भावनाओं पर विचार करने की जरूरत तो है ही , बाँकी — जो है सो है ।

विगत वर्षों के राजनीतिक आंदोलनों , विचारों से प्राप्त नेताओं की कृतित्व एवं व्यक्तित्व में असमानता के जीवन दर्शन ने राष्ट्रीय आकांक्षाओं को गंभीर निराशा की ओर धकेला है जिस पर चिंतन तथा तदनुरूप कार्यवाही लोकतांत्रिक अनिवार्यता मानी जा सकती है ताकि खंडित जनादेश के राजनीतिक पंडितों की भविष्यवाणी का दुष्परिणाम राष्ट्र निर्माण में बाधक न बने। दुर्भाग्यवश, विकराल जनसंख्या वृद्धि तथा तुष्टिकरण नीति से त्रस्त भारतीय संसाधन वास्तविक अर्थों में राष्ट्र नायक के अवतरण हेतु व्याकुल है। संभवत, हम दो हमारे दो की जनसंख्या नीति का पालन न करने वाले नागरिकों की सभी सरकारी सुविधाओं पर रोक जैसे कठोर निर्णय भारतवर्ष की अनिवार्यता मानी जा सकती है। भेदभाव पूर्ण, शोषण रहित नीतियों तथा तुष्टिकरण से दूर के दर्शन तथा कृतित्व एवं व्यक्तित्व में समानता का राजनीतिक व्यक्तित्व ही वास्तविक अर्थों में राष्ट नायक के जयकारे की गूंज प्रतिध्वनित करा सकता है। महान ऋषि परंपराओं के भारतवर्ष को राष्ट्र नायक के अवतरण हेतु अभी और इंतजार करना होगा। Deveshwar Dwivedi सर की दो लाइन
हमें गटर का पानी भाता है फिर गंगाजल बदबू मारता है
ठीक वैसे ही जैसे हम सदियों से विश्व गुरु हैं।