झाँक कर देखो मन के भीतर,,,

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह,सहज़,हरदा,मध्य प्रदेश

अधर्म का छाया था जो अंधियारा, सत्य का सूरज फिर मुस्काया।
नवरात्र का अनुष्ठान हुआ पूरा, विजयदशमी का यह पर्व आया।
राम के बाणों की संधान दिशा, दुर्गा माँ का तेजस्वी अवतार।
सदा यही संदेश हमें देता, सत्य की होगी जग में जयकार।
दस शीश का रावण बाहर ही नहीं, झाँक कर देखो मन के भीतर।
काम, क्रोध, मद, मोह, अहंकार का, बसा हुआ साम्राज्य है अंदर।
केवल पुतले को जलाना काफी नहीं, चेतना जागे तो दशहरा सार्थक।
मन के रावण का खुद वध करके, बनें अच्छाई के सच्चे वाहक।
आओ मिलकर आज संकल्प लें, सत्य और न्याय की राह बढ़ाएँ।
भीतर की बुराइयों को त्यागकर,सच्चे अर्थों में दशहरा मनाएँ।

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