मुट्ठी भर साँसें और क्षुद्र अहंकार का पाखंड,जीवन के परम यथार्थ की पुकार

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह,सहज़,हरदा,मध्य प्रदेश “ज़िंदगी कितनी सी है, कितने जीते हैं हम…”यह पंक्ति मात्र एक विलाप या साधारण जिज्ञासा नहीं है, बल्कि यह मानव चेतना की उस गहरी सुप्त अवस्था पर एक तीखा प्रहार है, जिसमें मनुष्य अपने अस्तित्व के मूल सत्य से पूरी तरह कट चुका है। असीम काल-प्रवाह के अनंत आकाश में … Continue reading मुट्ठी भर साँसें और क्षुद्र अहंकार का पाखंड,जीवन के परम यथार्थ की पुकार