दिल्ली बंद : कॉकरोच (GenZ) आंदोलन पर सरकार सख्त? राजधानी बनी छावनी

देश की राजधानी आज एक अभूतपूर्व सुरक्षा घेरे में है। सोशल मीडिया से शुरू होकर सड़कों तक पहुंचे कॉकरोच (GenZ) आंदोलन यानी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आज जंतर-मंतर पर प्रस्तावित महाप्रदर्शन को देखते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।

इस आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरी नई दिल्ली को एक तरह से छावनी में तब्दील कर दिया गया है और कई इलाकों में लॉकडाउन जैसी पाबंदियां नजर आ रही हैं। इस अनूठे आंदोलन की शुरुआत मुख्य रूप से देश के युवाओं (जेनरेशन जेड) द्वारा व्यवस्था के खिलाफ एक व्यंग्यात्मक (satirical) और तीखे विरोध के रूप में हुई थी। हाल ही में हुए इस आंदोलन का ताजा रुख मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर है, जिसमें मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है। इससे पहले यह आंदोलन देश में पेपर लीक और राष्ट्रीय परीक्षाओं (जैसे NEET) में हुई धांधलियों को लेकर सड़कों पर उतरा था और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर चुका है। आंदोलन के संस्थापकों, जिनमें अभिजीत दिपके और सौरभ दास जैसे युवा चेहरे शामिल हैं, का कहना है कि वे लोकतांत्रिक अधिकारों और युवाओं के भविष्य के लिए यह लड़ाई लड़ रहे हैं। हालांकि, सरकार और सत्ता पक्ष (BJP) ने इन आरोपों को निराधार बताया है और आंदोलन के पीछे “अराजक तत्वों” और सोशल मीडिया हाइप का हाथ होने की बात कही है। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए CJP को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है। पुलिस का तर्क है कि इस प्रदर्शन के लिए तय दिशा-निर्देशों के तहत 10 दिन पहले आवेदन नहीं किया गया था। इसके साथ ही नई दिल्ली इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी गई है, जिसके तहत पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी है।

आप देखिये दिल्ली प्रशासन द्वारा उठाए गए कुछ कड़े कदम क्या – क्या हैं। इंटरनेट ब्लैकआउट,मेट्रो और ट्रेनों पर ब्रेक और भारी सुरक्षा बल की तैनाती । इंडिया गेट और सेंट्रल दिल्ली के 4 किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को 24 घंटे के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। सुरक्षा के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो के करीब 57 स्टेशनों के गेट बंद करने या उनकी फ्रीक्वेंसी कम करने के निर्देश जारी किए गए। इसके अलावा, दिल्ली आने वाली लगभग 250 से अधिक ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं या उनके रूट में बदलाव किया गया है, ताकि प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ को राजधानी में घुसने से रोका जा सके। दिल्ली के तमाम बॉर्डरों (जैसे चिल्ला और गाजीपुर बॉर्डर) पर पैरामिलिट्री फोर्स और राज्य पुलिस के करीब 38 हजार से अधिक जवानों को तैनात किया गया है। देश के अन्य राज्यों (जैसे पुणे और मध्य प्रदेश) से दिल्ली आ रहे सैकड़ों CJP कार्यकर्ताओं को रास्ते में ही हिरासत में लिए जाने की खबरें हैं। सरकार और पुलिस की इस अत्यधिक सख्ती पर देश की सर्वोच्च अदालत ने भी संज्ञान लिया है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आम जनता को पूरी तरह से पंगु बना दिया जाए। CJI ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “आपको चीजों को नियंत्रित करना होगा, लेकिन मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल न करें।” सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि दिल्ली मेट्रो और ट्रेन सेवाओं को पूरी तरह से ठप न किया जाए, बल्कि उन्हें नियंत्रित और सुचारू तरीके से चलाया जाए ताकि आम मुसाफिरों को परेशानी न हो। इस आंदोलन को लेकर देश का सियासी पारा भी चढ़ गया है।

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने CJP के इस आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए इसमें शामिल होने का ऐलान किया है। वहीं दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के साथ इस आंदोलन के कुछ मतभेद भी दिखाई दे रहे हैं, और कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस समय चेन्नई में एक अलग रैली कर रहे हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं ने भी बयान जारी कर कहा है कि लॉकडाउन जैसी पाबंदियों के बीच दिल्ली पुलिस को शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लोकतांत्रिक अधिकार का सम्मान करना चाहिए। CJP के नेताओं ने साफ कर दिया है कि भले ही उन्हें जंतर-मंतर जाने से रोका जाए, लेकिन देशभर से आ रहे युवा हार नहीं मानेंगे और उन्हें जहां भी रोका जाएगा, वे वहीं बैठकर अपना शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराएंगे। पुलिस की नाकेबंदी और इंटरनेट बैन के कारण फिलहाल सेंट्रल दिल्ली में सन्नाटा पसरा हुआ है, लेकिन सोशल मीडिया जनरेशन का यह ‘कॉकरोच आंदोलन’ आने वाले दिनों में भारतीय राजनीति और युवा विमर्श को किस दिशा में ले जाएगा, यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा।

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