डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह “सहज़”

जीवन एक अनवरत यात्रा है, जहाँ हर नया दिन एक नई चुनौती और नया इम्तिहान लेकर उपस्थित होता है। इस जीवन-यात्रा में कई मोड़ ऐसे आते हैं जहाँ बाधाएँ विशालकाय पर्वतों की भाँति मार्ग रोककर खड़ी हो जाती हैं। ऐसे कठिन क्षणों में जब व्यक्ति थकान और निराशा से घिरने लगता है, तब उसे आगे बढ़ने की असीम शक्ति केवल एक ही चीज़ से मिलती है,वह है उसका ‘अडिग हौसला’।पुराने समय से ही यह सत्य सर्वमान्य रहा है, “हौसले बुलंद हों तो मंजिलें खुद करीब आने लगती हैं, जंग तलवारों से नहीं, हौसलों से जीती जाती हैं।”
यह केवल एक भावुक काव्यात्मक उक्ति नहीं, अपितु इतिहास, मनोविज्ञान और मानवीय जीवन-दर्शन का वह कड़वा-मीठा सच है जिसे हर युग ने प्रमाणित किया है।
संसाधनों से बड़ी इच्छाशक्ति,
इतिहास साक्षी है कि संसार के बड़े-बड़े परिवर्तन और महान सफलताएं और जीत केवल संसाधनों, हथियारों या धन-बल के भरोसे नहीं हासिल की गईं। यदि किसी के पास संकल्प की दृढ़ता है, तो सीमित साधनों के बावजूद इतिहास की धारा को मोड़ा जा सकता है। युद्ध केवल शस्त्रागार के बल पर नहीं, बल्कि सेनापति और सैनिकों के उच्च मनोबल से जीते जाते हैं। दैनिक जीवन के संघर्ष में भी यही सिद्धांत काम करता है,सुविधाओं के आभाव में भी यदि हमारे पास जिजीविषा और आगे बढ़ने की लगन जीवंत है, तो कठिन से कठिन रास्ते भी सुगम हो जाते हैं,

‘मौक़ा’, जीवन का अनमोल और क्षणभंगुर उपहार
हौसले के साथ-साथ सफलता के इस समीकरण में एक और अत्यंत महत्त्वपूर्ण कारक कार्य करता है,वह है ‘मौक़ा’ (अवसर)।
‘मौक़ा’ महज़ दो अक्षरों का एक साधारण शब्द नहीं है, बल्कि यह जीवन का वह स्वर्णिम क्षण है जो मनुष्य के भाग्य की दिशा बदलने का सामर्थ्य रखता है। ‘मौका़” जितना छोटा शब्द है, जीवन के द्वार पर उसकी दस्तक भी उतनी ही कम समय के लिए होती है। यह एक अत्यंत क्षणभंगुर मेहमान है, जो बहुत धीमी आवाज़ में द्वार खटखटाता है और यदि समय रहते इसे न पहचाना गया, तो यह पलक झपकते ही ओझल हो जाता है। बुद्धिमानी और दूरदर्शिता इसी में निहित है कि जब भी जीवन कोई अवसर प्रस्तुत करे, उसे तत्काल पहचानकर पूरे उत्साह और तैयारी के साथ थाम लिया जाए। एक बार हाथ से छूटा हुआ अवसर पुनः लौटकर आएगा या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं होती। अवसर का गँवा दिया जाना प्रायः केवल पछतावा ही दे जाता है।

दृष्टिकोण का अंतर और असफलता का सबक़,
लंद हौसले वाले व्यक्ति की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि वह हर विकट परिस्थिति में छिपे हुए ‘मौके’ को भांप लेता है। जहाँ एक कमजोर और संशयग्रस्त मन हर अवसर में कठिनाई ढूंढता है, वहीं एक साहसी और सकारात्मक व्यक्ति हर कठिनाई के पीछे छिपे अवसर को उजागर कर लेता है। मार्ग में आने वाली असफ़लताएँ किसी यात्रा का अंत नहीं होतीं, बल्कि वे अनुभव की ऐसी सीढ़ियाँ हैं जो व्यक्ति को आने वाले अगले मौक़े के लिए और अधिक परिपक्व बनाती हैं। बुलंद हौसला इंसान को बिखरने नहीं देता, बल्कि हर हार के बाद उसे और अधिक ऊर्जा के साथ खड़े होने की प्रेरणा देता है। अंततः, जीवन के इस महासमर में विजयी वही होता है जिसके भीतर आत्मविश्वास की ज्वाला प्रज्वलित है और जो जीवन के द्वार पर मिलने वाले ‘अवसरों’ का सदुपयोग करना जानता है। जीत के लिए केवल बाह्य साधनों या शास्त्रों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि भीतर की अटूट इच्छाशक्ति और समय की नज़ाकत को समझने की सूक्ष्म दृष्टि की आवश्यकता होती है। यदि आपके इरादे बुलंद हैं और आपकी आँखें हर सही मौक़े को पहचानने के लिए सजग हैं, तो यक़ीन मानिए, मंज़िलें खुद-ब-खुद आपके क़दमों की ओर बढ़ने लगेंगी।




