अफ़साना,पहाड़ी ढलान का आख़िरी सूरज,अधूरे ख़्वाब का हमसफ़र

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह,सहज़,हरदा,मध्य प्रदेश गाड़ी के रुकते ही धुएँ का एक भारी गुबार खिड़की के टूटे हुए शीशे से अंदर दाखिल हुआ। बस के ड्राइवर ने बिना मुड़कर देखे, रूखे स्वर में कहा “साब! कुंदनगढ़ आ गया। “मैने जब बस से उतरकर अपने छोटे से लेदर बैग को कंधे पर डाला, तो चारों तरफ़ … Continue reading अफ़साना,पहाड़ी ढलान का आख़िरी सूरज,अधूरे ख़्वाब का हमसफ़र