चेहरे पर ऐसे गिराता क्यों है,,,

डॉ.मुश्ताक़ अहमद शाह, सहज़, हरदा, मध्य प्रदेश ​मेरे महबूब अब आ भी जा इतना मुझको सताता क्यों है।नागिन सी इन जुल्फों को चेहरे पर रह रह के गिराता क्यों है।दुनिया को पता वाबस्तगी का चल जाएगा यूं तो, अपनी।हर घड़ी हर वक़्त देखकर मेरी जानिब मुस्कुराता क्यों है।मुझको कहता है वो कि मैं तेरा हूँ, … Continue reading चेहरे पर ऐसे गिराता क्यों है,,,