उत्कंठा का सागर पार करने हेतु ज्ञान की पतवार मांगने लोग मीडिया और नेता जी के पास ही जाते है। सरकार के लिए विपक्ष को सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत देना तथा जनता के एकाउंट में पंद्रह लाख डालना उतना मुश्किल नहीं जितना लूटन भैया के सवालों का जवाब देना व उन्हें संतुष्ट करना होता है।

हमारे मुहल्ला के लूटन भैया काफी जिज्ञासु प्रवृत्ति के व्यक्ति है। ये और बात है कि वे जब भी किसी संशय या दुविधा की नाव पर सवार होते है तो उत्कंठा का सागर पार करने हेतु ज्ञान की पतवार मांगने मेरे ही पास आते है। सरकार के लिए विपक्ष को सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत देना तथा जनता के एकाउंट में पंद्रह लाख डालना उतना मुश्किल नहीं जितना लूटन भैया के सवालों का जवाब देना व उन्हें संतुष्ट करना होता है। जब तक वे संशयात्मक मुद्दे पर संतुष्ट नहीं होते हैं तब तक ऊलजलूल सवालों से दिमाग का दही करते रहते हैं। एक रात लूटन भैया ने एक विचित्र सपना देखा। स्वप्न में लूटन ने देखा कि वो सुबह सुबह अपने घर के बाहर चबूतरा पर बैठ कर दातून कर रहा है तभी कहीं से रेंगता हुआ एक काला नाग आया और उसके पैर को चूमकर चला गया। वह निःस्तब्ध हो जैसे ही खुद को संभाला तभी फिर कहीं से एक करैत आकर उसके पैरों को चूमकर चला गया । इस अचानक सर्प आगमन से वो घबरा गया। अभी वो कुछ सोच पाता कि कहीं से रेंगता हुआ एक दुधिया गेहूँअन आया और वो भी पैर चूमकर आगे बढ गया। उसकी जान मे जान अभी आई ही थी और वो कुछ समझ पाता कि तभी एक विषहीन ढोड़वा व हरहरा सांप भी पैर के आगे नाचने लगा। इतना ही नही उड़ने वाला हरे रंग का सुगवा सांप भी आया और पैरों को चूम उड़ गया। विषधर के आने जाने की क्रिया से वह खुद को संभाल पाता कि एक बड़ा सा अजगर आया और उसके सामने आकर याचना मुद्रा मे नृत्य करने लगा। मारे डर के लूटन जैसे ही चिल्लाया वैसे ही उसकी आंखे खुल गई। और वह बडबडाने लगा आइ हो दादा ई कइसन सपना रहल हो जे चारो ओर से सँपवन सब हाली हाली से अइलस और पैरवा छुई छुई के जा तारा। इसी स्वप्न पहेली मे उलझते हुए वह मेरे पास आ धमका। कान के उपर से बीड़ी निकाल कर सुलगाते हुए बोला-आ हो लेखक भैया ई कयसन अजीब सपना रहल हो जे में खाली सँपवन टोली नजर आइलस हो। इतना बोलकर वो रहस्यमयी रात्रि स्वप्न की सारी वृतांत सुना डाला। मैंने टालने के अंदाज में कहा-वाकई तुम्हारा स्वप्न रहस्यमयी है…

ऐसा करो तुम किसी तांत्रिक या ओझा जी के पास जाकर इस घटना के बारे में बताओ संभवतः वे ही इसका कुछ अर्थ समझा पाएं! अरे आप भी तो व्यंग्यकार है ज्ञानी-गुणी है कुछौ तो अर्थ समझ ही सकते है अपने नाॅलेज से…ष्लूटन ने मेरी विद्वता पर तंज सकते हुए कहा। अब तो बात मेरे ज्ञान पर आ गई थी। मैने प्रतिष्ठा बचाने के लिए एक बार पुनः लूटन से स्वप्न वृतांत सुना। गहराई से स्वप्न पर कुछ देर मंथन किया और उसे उसी की भाषा में समझाया-देखो भाई लूटन इ जो तुम्हारा सपना है हमको तो चुनाव से रिलेटेड लगता है। काहे कि चुनाव की घोषणा हो चुकी है। और तुमने स्वप्न आचार संहिता के दौरान देखा है। मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि तुम्हारे सपने मे आने वाले सर्प दरअसल चुनाव में खड़े उम्मीदवार थे जो तुमसे वोट की याचना कर रहे थे।जो अपराधी गुंडा प्रवृत्ति के कंडिडेट है वो कोबरा, करैत आदि विषधर के रूप मे नजर आया। पिछले बार का विजयी प्रत्याशी जिन्होंने क्षेत्र विकास मे कोई कार्य नहीं किया वो तुम्हें अजगर के रूप मे नजर आया। रही बात उड़ने वाले हरे साँप की तो वो अवसरवादी नेता था जो चुनाव जीत अगले पाँच साल तक संसदीय क्षेत्र से उड़ा हुआ रहेगा अर्थात गायब रहेगा। पर भैया ढोरवा सांप भी नजर आया बीच मे टोकते हुए लूटन बोल पड़ा। मैने समझाया-अरे बुरबक उ निर्दलीय उम्मीदवार होगा जो संप्रदाय जातिवाद के जहर से रहित निःस्वार्थ सेवा के लिए चुनाव मे खड़ा हुआ होगा अब रही बात हरहरा साँप की तो इलेक्शन में कुछ भोटकटवा उम्मीदवार भी त रहेगा ही ना है। उ सब त ठीक है भाई लेकिन इ बताइ कि इ हमार सपनवा में ब्लैक माम्बा, बैंडेड करैत, अनाकोंडा जैसन साँप काहे नही नजर आया बीड़ी से धुआँ फूकते हुए लूटन पुनः पूछ बैठा। अरे भाई ई हमारे क्षेत्र का संसदीय चुनाव है न जी! कौन्हो पाकिस्तान के पीएम या अमेरिका के प्रेसिडेंट का नहिएं ना है जो अनाकोंडा या विदेशी विषधर नजर आएगा झुंझलाते हुए मैं बोला। मेरी बातों से या फिर मेरे उखड़े मूड से चाहे जिस वजह से हो मुझे नहीं पता किंतु लूटन पूरी तरह संतुष्ट हो चुका था। अंततः उसे अपने रहस्यमयी स्वप्न से मुक्ति मिली और मुझे लूटन के उलझाने वाले प्रश्नो से।
विनोद कुमार विक्की
