डॉ. मुश्ताक अहमद शाह ‘सहज’ (हरदा, मध्य प्रदेश) शाम के धुंधलके में जब सूरज पहाड़ियों के पीछे छिपने लगा, तो आंगन में रखी पुरानी आरामदायक कुर्सी पर बैठे बाबा की नज़रें घर के मुख्य दरवाजे पर टिकी थीं। हवा का एक हल्का सा झोंका आया और पेड़ से कुछ सूखे पत्ते टूट कर नीचे गिर … Continue reading अभी कल ही की तो बात लगती है…
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