आजकल बंद भी महोत्सव होता है

मैं महान, नहीं मैं महान रूपी स्थापना के जंग से दुनियाँ जंग में है जिसके कारण संपूर्ण पृथ्वी पर बंदी का शास्त्रीय संगीत प्रारंभ हो गया।

बंदी और मंदी के हाइ वोल्यूम डीजे की धून में नमो राग या मोदी म्यूजिक भी फीका पड़ गया। जंग रूपी  एक सूक्ष्म कीड़ा ने देश को महीनों बंद होने पर मजबूर कर दिया। इस बंदी महोत्सव का थाली थाप, कैंडल लाइट के बाद नली नाले से गैस का उत्पादन से हर वर्ग के लोगों ने फूल टूस एंजॉय कर रहे हैं । गैस की कमी सड़यंत्र , जगह जगह गैस के लिए लाइन और नरेंद्र भी गायब और सिलेंडर भी गायब आदि आपस में पर्यायवाची शब्द है। भले ही ट्रंपवा और देशी चौकी दरबा के उत्पात पर दुनिया ने गैस के लाइन का लुत्फ ले रहा हो  किन्तु इस मामले में  हम भारतीय  और खासकर हम बिहारी काफी सौभाग्य शाली हैं। हम दारू पर लाखों लूटा देंगे पर गैस के लिए लाइन में जान देंगे । आप ही बताईये ना यहाँ खादीजीवी कीड़ों द्वारा जाति, क्षेत्र, मंहगाई, अपराध आदि के नाम पर सप्ताह, पखवाड़ा या महीना में आयोजित भारत बंद महोत्सव को हम लोग गाहे बगाहे पुरी श्रद्धा के साथ सेलिब्रेट कर ही लेते हैं।

आइए , जब तक परोसी नाले में गैस खोजते हैं तब तक हम आप आज के प्रसंग में हम बंद महोत्सव का महिमा मंडन करते हुए इस गैर लोकतांत्रिक महापर्व पर संक्षिप्त परिचर्चा करते हैं। भारत बंद महोत्सव एक ऐसा असंवैधानिक त्यौहार है जिसे हम भारतीय सप्ताह या दस दिन पर सरकार के विरोध में पुरी निष्ठा एवं सौहार्द के साथ मनाते हैं। या यूँ कहें कि जब इच्छा हो जाती है तो बिना कारण भी घोर आस्था के साथ बड़ी धूम धड़ाम के साथ आयोजित कर ही लेते है।

आइए आज हम आपको इस महोत्सव के बारे में खूब जानकारीयां उपलब्ध करवाते हैं। सबसे पहले आप भारत बंद महोत्सव का परिभाषा जानिए . बंद चाहे वो भारत बंद हो या कोई प्रांतीय बंद का आशय ऐसी परिघटना से है जिसमें कुछ बैनर कुछ लाठीए, कुछ बांस और सत्तू चाय पर उपलब्ध लफुओं के बूते आम जनता को परेशान किया जाता है। बंद अल्प पूंजी पर अंजाम दी जाने वाली ऐसी प्रक्रिया है जिसमें जानमाल की अपार क्षति निहीत होती है और कोई नेता अपना उल्लू सीधा जरुर करता है। अब आपको परिचित करवाता हूँ भारत बंद महोत्सव के उद्देश्य से- बंद जैसे पुनीत कार्य के दौरान  चौक.चौराहा पर आगजनी, मस्जिद के आगे डीजे , रेलवे ट्रैक पर धरना देना ;कुछ विशेष परिस्थितियों में रेलवे ट्रैक को उखाड़ देना, बस का शीशा तोड़ देना, बस में आग लगा देना, दुकान लूट लेना, सरकारी संपत्ति का नुकसान आदि इसका मूलभूत उद्देश्य होता है। भारत बंद महोत्सव का बिषय से भी थोड़ी अवगत हो जाएँ – भारत बंद महोत्सव के लिए कोई मुद्दा या विषय ज्यादा माइने नहीं रखता। घरेलू पार्टी से लेकर राष्ट्रीय पार्टी छोटी जाति से लेकर अगड़ी जाति तक इसका भरपूर उपयोग करते है।  बीच.बीच में  टमाटर, दाल, प्याज़, पेट्रोल भी बंद का सबजेक्ट बन जाते हैं। गैस सिलेंडर , नरेंद्र सरेंडर , अपस्टिन फाइल जैसे ज्वलंत मुद्दे पर  इस महोत्सव का आयोजन एक अवश्यंभावी प्रक्रिया है।अब देखीय की इसके यानि भारत बंद महोत्सव का आयोजक कौन और कैसा होता है।

उँगली छाप, कमल छाप, किचर छाप , गाय छाप, गोबर छाप , हिन्दू छाप , मुसलमान छाप , हाथी छाप, लालटेन छाप ,ढिबरी छाप, फूलगोभी छाप, रिक्शा छाप, घोड़ा छाप आदि वाली राजनीतिक पार्टियां या बड़ी जाति वाले,लघु जाति वाले, आरक्षण पाने वाले, आरक्षण हटाने वाले आदि।अब आप सोंच रहे होंगे की भारत बंद महोत्सव का व्यय खर्च व पूंजी क्या होता है तो देख लीजिये भारत बंद महोत्सव में नाममात्र का खर्च नहीं है चूंकि जियो नेट पैक तो ऑलरेडी भरा हुआ है ही आपके मोबाइल में। बस फेसबुकए व्हाटसएप के ग्रूप पर कुछ दिन पहले से फोटो शाप किया हुआ भारत बंद का मैसेज अपलोड कर देना है। लाउडस्पीकर पर प्रचार या समाचार पत्र में विज्ञापन दिए बिना बंद को सफल बनाया जा सकता है। सत्तू, चाय, गुटखा पर 4.6 घंटे के लिए कार्यकर्ता हर सीजन हर समय उपलब्ध है। और अगर यदि दारु.मुर्गा की व्यवस्था हो तो कार्यकर्ता बंद के दौरान ओवर टाइम करने को भी तत्पर रहते हैं। बाकी बंद अभियान के दौरान लूट.खसोट में अपनी हूनर और क्षमता अनुसार जो हासिल कर सकें वो अलग से । अब आते हैं भारत बंद महोत्सव के  क्रियान्वयन पर – बंद को क्रियान्वित करने के लिए ज्यादा कुछ करना नहीं होता है। बस दो चार बैनर, जलाने के लिए पंक्चर टायर, कुछ लाठियाँ और उसको थामने वाले बैठारी व्यक्ति। ये मूल चीज़ें है जो बंद को अंजाम देने के लिए काफ़ी है। बांस या बेंच को सड़कों के बीच लगा देने का जज़्बा एवं उत्साह होना ही बंद को सफल बनाने के लिए काफी है। भारत बंद महोत्सव से लाभ भी देख ही लें बेरोजगार व बैठारी लोगों को एक दिन के लिए रोजगार व भोजन भात,पान.बीड़ी की व्यवस्था हो जाती है। जाम के दौरान जहाँ तहाँ फंसकर आम लोग भागदौड़ वाली जिंदगी में थोड़े समय के लिए ठहराव व सुकून महसूस करते है। बंद के दौरान फंसे हुए एम्बुलेंस में दम तोड़ने वाले मरीज को समय से पहले ही ईश्वर से मुलाकात हो जाती है तथा परिजन उस मरीज पर आने वाले खर्च से बच जाते हैं। वाहनों के नहीं चलने से पेट्रोल.डीज़ल की बचत तो होती ही है साथ ही बंद वाले दिन वातावरण में प्रदूषण रहित शुद्ध वायू का प्रवाह होता रहता है। न्यूज चैनल की टीआरपी उस दिन के लिए बढ़ जाती है। नवजात से जन्मजात नेताओं द्वारा शक्ति प्रदर्शन और तोड़फोड़ करनाआदि। बंद के साइड इफेक्ट को भी देख ही लें।

हालाँकि ये तथाकथित बंद किसी सरकारी आदेश या स्वीकृति से नही होती है किंतु हमेशा सरकार के विरुद्ध ही होती है। सबसे मजे की बात यह है कि सरकार या सफेदपोशों को इस बंद से तो कोई परेशानी नही होती किंतु इसका खामियाजा आम जनता को ही भुगतना पड़ता है। अब आते हैं भारत बंद महोत्सव के निष्कर्ष पर-  बंद महोत्सव एक महाअभियान है इसे समय समय पर ईद दिवाली, होली, मुहर्रम की तरह या बिना किसी कारण के भी मनाना चाहिए। बंद जैसे जन जागरूक अभियान को हर सप्ताह मनाने के लिए संसद में विधेयक लाकर इसे विधि मान्यता दी जानी चाहिए।

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