एक अजब ज़िंदगी, तवायफ़ की दास्ताँ, महफ़िल और कोठा

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह,सहज़, हरदा,मध्य प्रदेश दिन ढलते ही शहर की रौनक बदल जाती थी। एक तरफ़ इत्र की ख़ुशबू और दूसरी तरफ घुंघरूओं की झनकार। शाम ढलती और कोठे की सीढ़ियों पर रईसजादों की भीड़ जुटने लगती। तवायफ़ की दुनिया सिर्फ़ इतनी थी,लोगों का दिल बहलाना, उनके ग़म भुलाना और ख़ुद के आंसुओं को … Continue reading एक अजब ज़िंदगी, तवायफ़ की दास्ताँ, महफ़िल और कोठा