मानव जीवन अनेक विविधताओं से भरा हुआ है। अपने जीवनकाल में उसे अनेक प्रकार के कर्तव्यों व दायित्वों का निर्वाह करना पड़ता है। इनमें वह इतना अधिक व्यस्त हो जाता है कि अपनी व्यस्त जिंदगी से स्वयं के मनोरंजन आदि के लिए समय निकालना भी कठिन हो जाता है पर हमें सकारात्मकमता की राह नही भूलनी चाहिए

सकारात्मकता की शुरुआत आशा और विश्वास से होती है। किसी जगह पर चारों ओर अँधेरा है और कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा और वहां पर अगर हम एक छोटा सा दीपक जला देंगे तो उस दीपक में इतनी शक्ति है कि वह छोटा सा दीपक चारों ओर फैले अँधेरे को एक पल में दूर कर देगा, इसी तरह आशा की एक किरण सारे नकारात्मक विचारों को एक पल में मिटा सकती है। नकारात्मकता को नकारात्मकता समाप्त नहीं कर सकती, नकारात्मकता को तो केवल सकारात्मकता ही समाप्त कर सकती है इसीलिए जब भी कोई छोटा सा नकारात्मक विचार मन में आये उसे उसी पल सकारात्मक विचार में बदल देना चाहिए। पढाई में आपकी चाहे कितनी भी दिलचस्पी हो या पढने का जूनून हो परन्तु परीक्षा के वक्त अधिकांश छात्र तनाव की स्थिति में आ ही जाते है. तनाव की अधिकता आपके लिए नुकसानदायक हो सकती है.कई छात्र एग्जाम के समय अपने पढाई के टाइम को बहुत बढ़ा देते है और कुछ बच्चे और अधिक नंबर लाने के चक्कर में दिन भर किताबो से चिपके रहते है. ऐसी स्थिति का परिणाम यह होता है की रीजल्ट आने तक चिंता में डूबा रहते है. परीक्षा से होने वाले तनाव के कारण भय व डर की स्थिति उत्पन्न होती है जिसे एग्जाम फोबिया कहते हैं. ऐसी स्थिति में स्टूडेंट को कड़ी व पूरी मेहनत करने के बावजूद भी अनुकूल परिणाम नहीं मिल पाता इसलिए आपके लिए यह जरुरी है की इस तनाव को खुद पर हावी न होने दे और इससे बचे.मानता हूं कि अभिभावकों के साइड से बेहतर परिणाम लाने का दवाब होना है।
इसकी प्रमुख वजह है अभिभावक का अपने बच्चे पर अधिक मार्कस लाने का दबाव डालना जो लगभग हर स्टूडेंट के तनाव का कारण बनता है. हर माता पिता यह चाहते है की उनका बच्चा बहुत अच्छे अंक लाये और उनका नाम रोशन करे. अच्छे अंक से उसे अच्छे कॉलेज में दाखिला मिल जायेगा या वो उसे कोई कोर्स कराये जिससे उसका भविष्य उज्ज्वल बने. इस तरह का दबाव बार बार डालने से स्टूडेंट पर बहुत ज्यादा अंक लाने का बोझ पड़ जाता है. जो उसको तनाव में धकेल देता है. कई छात्र पूरे सालभर मौज मस्ती करते है और जब परीक्षा की घडी आती है उस समय बहुत परेशान हो जाते है. वे परीक्षा के दिनों से कुछ समय पूर्व पढ़ना आरम्भ करते है जिससे उनको अपनी पढाई एक चट्टान नजर आती है. पढाई करने का दबाव उनको मानसिक तौर पर बीमार बनाने लगता है. जो छात्र पूरे साल थोड़ा थोड़ा भी पढता है वह परीक्षा के समय चिंता से मुक्त रहता हैए वही उन छात्रो को इस समय बहुत कठिनाई होती है जिन्होंने पूरे साल कुछ भी पढ़ा नहीं होता है.यह दबाव हर उस छात्र को होता है जिसको अच्छे नंबर लाने होते है.चाहे परीक्षा के तैयारी का समय हो परीक्षा का वक्त हो या उसके बाद रिजल्ट के इन्तजार का माहौल हो. इस समय प्रेशर से बचना बहुत जरुरी है. इसलिए रिलैक्स स्टडी से ही अच्छे परिणाम की उम्मीद की जा सकती है. इसलिए पढाई और परीक्षा को लेकर खुद में डर पैदा न करे. पढाई में मेहनत करे और समय दे. नियमित रूप से पढ़ने की आदत डाले और रूटीन के अनुसार पढ़े. सिलेबस के अनुसार तैयारी करे. इससे तैयारी भी अच्छी होगी और परीक्षा के समय बेवजह तनाव का सामना नहीं करना पड़ेगा. आपको अपनी परीक्षा के शेड्यूल के अनुसार अपने पढाई का सिस्टम बनाना होगा. किस तरह पढ़ना है उसकी योजना बना ले और फिर उस योजना के तहत दिनचर्या का हर हाल में पालन करे. अगर आपने बेहतर योजना बनाई है तो इससे एग्जाम की तैयारी में सहूलियत होती है जिससे आपको तनाव भी नहीं होगा.परीक्षा के दिनों में आपका पढाई के लिए ऐसा माहौल होना चाहिए, जहाँ आपको किसी भी प्रकार की बाधा न आये. आप किसी अलग कमरे में पढाई कर सकते है जहाँ कोई और न हो. आप टेलीविजन की आवाज से तथा अन्य किसी भी प्रकार के शोर शराबे से दूर रहे जिससे आपको कोई तकलीफ न हो. अगर आपने इसमें लापरवाही की तो आप मेहनत करने के बावजूद किसी विषय को गहराई से समझ नहीं पाएंगे. अगर आपका पढाई का माहौल अच्छा होगा तो तनाव भी आपसे दूर रहेगा. आशावादी सोच हमारे अन्दर एक नयी स्फूर्ति पैदा करती है इसलिए एग्जाम से पहले अच्छे रिजल्ट के बारे में इमेजिन करे और उसे एन्जॉय करे. आप यह कल्पना करे की आपके क्लास में सबसे ज्यादा अंक आये है और आप अगली क्लास में है. इसके अलावा आपके साथ पहले जो भी अच्छा हुआ उसके बारे में विचार करे. इससे मन में आशा का संचार होता है और तनाव को काबू में रखने में मदद मिलती है. रोज एक नयी उम्मीद देने वाला विचार मन में अवश्य लाये. परीक्षा के दौरान स्वाभाविक रूप से पढाई में तीव्रता आ जाती है. ऐसे में लम्बे समय तक स्टडी में लगे रहना थकान उत्पन्न करता है. इसलिए गहन अध्ययन के दौरान बीच बीच में ब्रेक जरुर ले. साप्ताहिक व मासिक ब्रेक भी फायदेमंद है. इससे स्ट्रेस की मात्रा कम होती है। ब्रेक के दौरान आप दोस्तों से बाते कर सकते है गाना सुन सकते है टहल सकते है। परीक्षाओ के दौरान यदि किसी विषय को समझने में मुश्किल आये तो उस विषय के शिक्षक से सलाह जरुर ले.स्टडी के दौरान अपने खान पान को भूल जाना गलत आदत होती है. इसका पढाई पर विपरीत असर होता है. जब सेहत ही सही नहीं होगी तो भला पढाई कैसे अच्छी तरह से हो सकेगी इसलिए संतुलित खाए. इस दौरान जंक फूड की अधिकता से बचे. ऐसे आहार न ले जो जरुरत से ज्यादा तैलीय और वसायुक्त हो. एक बात और नियमित अन्तराल पर खाना जरुर खाएं. पढाई के कारण खाना कतई न भूले. परीक्षाओ के दिनों में तनाव से निकलने का सबसे आसान तरीका है नियमित रूप से व्यायाम करना. व्यायाम आपको मानसिक रूप से व शारारिक रूप से फिट रखेगा. यह याद रखे कि शारारिक सक्रियता मानसिक तनाव को कम करने में मददगार होती है. बीच बीच में रिलैक्स्ड होकर गहरी साँस लेना फायदेमंद होता है.नींद का मनुष्य के स्वस्थ रहने से गहरा नाता है. आप किसी भी स्वस्थ व्यक्ति से पूछ ले आपको यह जरुर पता चल जायेगा की जो व्यक्ति स्वस्थ होता है वह अपनी नींद पूरी लेता है. मानसिक काम की अधिकता के दौरान न सिर्फ आराम बल्कि नींद की भी पर्याप्त जरुरत होती है. इसलिए परीक्षा के दौरान भी कम से कम 7 घंटे की नींद जरुर ले. आप नींद से किसी भी प्रकार का समझौता न करे.
