कम से कम 30 से 35 फीसदी मुसलमानों ने एनडीए के पक्ष में वोट किया है। जनता दल यूनाइटेड के नेता और एमएलसी गुलाम रसूल बलियावी ने एक बड़ा दावा किया है।

बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की सुनामी ने महागठबंधन को चारों खाने चित कर दिया है। महागठबंधन के नेता इस हार से सदमे में है। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि आखिर इस सुनामी की वजह क्या रही। बिहार चुनाव का नतीजा स्पष्ट संदेश देता है कि जनता ने नीतीश कुमार जी के 20 साल के विकास कार्यों का इनाम दिया है । मैं पिछले 4 महीनों से बिहार के कोने–कोने, लगभग 65 विधानसभा क्षेत्रों के गांवों में घूम रहा था। हर जगह एक ही सवाल पूछा—नीतीश कुमार ने आपको कहाँ उपेक्षित किया? किया सरकारी योजनाओं में भेदभाव हो रहा है? बलियावी ने कहा कि मुसलमानों से जवाब बेहद साफ़, बेबाक और एक जैसा मिला। किसी ने भेदभाव की बात नहीं कही। नीतीश कुमार जी ने हुकूमत चाहे जिसके साथ चलाया हो कभी भेदभाव नहीं किया। जो सुविधा सबको मिला, वही मुसलमानों को भी मिला। बलियावी ने कहा कि बिहार को उनसे बेहतर मुख्यमंत्री न पहले मिला, न आज दिख रहा है। जाति–धर्म की राजनीति करने वालों को यह संदेश साफ़ है कि बिहार अब काम की राजनीति चाहता है, नफ़रत की नहीं। नीतीश कुमार जी पर यह भरोसा 20 साल की सड़कें, शिक्षा, सुरक्षा, शांति और सुशासन की कमाई है। बलियावी ने कहा कि काम की राजनीति मजबूत हुई है, जाति की राजनीति कमज़ोर। बता दें कि विधानसभा चुनावों में एनडीए ने 202 सीटों पर जीत हासिल की जबकि महागठबंधन केवल 35 सीटों पर सिमट गया। वहीं अन्य के खाते में 6 सीटें आईं। अब जनता दल यूनाइटेड के नेता और एमएलसी गुलाम रसूल बलियावी ने एक बड़ा दावा किया है। उनका दावा है कि कम से कम 30 से 35 फीसदी मुसलमानों ने एनडीए के पक्ष में वोट किया है। बलियावी ने दावा किया कि खुद उन्होंने कई इलाकों में दौरा किया। करीब 65 विधानसभा क्षेत्रों के गांवों का दौरा किया। 4 महीने के इस अभियान के दौरान उन्हें इस बात का आभास हो गया था कि कम से कम 30 से 35 फीसदी मुसलमान एनडीए के पक्ष में मतदान करेगा। एनडीए को मिली बंपर जीत और इस अनुमान के आधार पर उन्होंने कहा कि मुसलमानों ने इस चुनाव में लगभग 35% वोट एनडीए गठबंधन को नीतीश कुमार जी के विकास कार्यों पर दिया है।
