किसी की याद से रुख़्सत हो गया हूँ मैं….

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह ‘सहज़’, हरदा,मध्य प्रदेश अपनों की भीड़ में रह कर भी तन्हा हो गया हूँ मैं, अपनी ही नज़र में खुद पर ही रुस्वा हो गया हूँ मैं। ​बुझा कर शम्अ खुद अपने ही हाथों से अँधेरे में, किसी की उम्मीद में रोशनी का धोखा हो गया हूँ मैं। ​ज़माने की नज़र … Continue reading किसी की याद से रुख़्सत हो गया हूँ मैं….