कॉकरोच,सीएए,एसआईआर, ईसीआई, सत्ता, शंका, बुलडोजर न्याय,हंगामा नही संवाद हो

छात्रों पर लाठीचार्य, अक्सर पेपर लीक, 80% जनता 5 किलो अनाज पर आश्रित, पेट्रोल के दामों में बृद्धि, दिल्ली का जनता लालची(किसी ने कभी कहा था ),सीएए, एसआईआर, ईसीआई, सत्ता, शंका, बुलडोजर न्याय,इलेक्शन से पहले घुसपैठिया, सरकार बदलना , चोरी का आरोप, हम पत्रकार कॉकरोच पर इन सब में हंगामा ही हंगामा संवाद गायब

सीएए,एसआईआर, ईसीआई, सत्ता, शंका, बुलडोजर न्याय के खिलाफ विरोध देश के लगभग हर कोने में फैल गया है , विरोध के कारण भिन्न भिन्न होते हैं। कुछ लोग विरोध कर रहे है क्योंकि सीएए,एसआईआर, ईसीआई, सत्ता, शंका, बुलडोजर न्याय कथित रूप से देश की धर्मनिरपेक्ष और संवैधानिक पहचान का उल्लंघन करता है जबकि अन्य को डर है कि इससे उनकी भाषाई और सांस्कृतिक पहचान खतरे में पड़ जाएगी। फिर भी अन्य लोगों का मानना है कि जबकि सीएए,एसआईआर, ईसीआई, सत्ता, शंका, बुलडोजर न्याय स्वयं ही सहज है, प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी नागरिक रजिस्टर के साथ मिलकर, एक अभ्यास जो असम में विवाद में चला गया है, यह देश की मुस्लिम आबादी को बाहर करने का एक उपकरण बन जाएगा। इस आरोप से केंद्र सरकार को भारी झटका लगा, इससे स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक रूप से गृह मंत्री अमित शाह के दावे का खंडन किया है कि 2024 तक देशव्यापी एनआरसी तैयार किया जाएगा, हुआ क्या । तो सीएए,एसआईआर, ईसीआई, सत्ता, शंका, बुलडोजर न्याय के खिलाफ देश क्यों गया है, जिसने मोदी सरकार को भी अस्थिर कर दिया है? यह सीएए,एसआईआर, ईसीआई, सत्ता, शंका, बुलडोजर न्याय से कैसे जुड़ा है? अगर इसे लागू किया जाता है, तो धर्म या भूगोल के बावजूद, आम आदमी के लिए उनके निहितार्थ क्या होंगे?

मतलब साफ है सीएए,एसआईआर, ईसीआई, सत्ता, शंका, बुलडोजर न्याय से सहमति असहमति अलग विषय है पर इन सबके बीच आपसी संवाद गायब है

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