हजारों छात्र, छात्र का पिता, देश के कोने – कोने से आई आम जनता आज जंतर मंतर पर शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगने के लिए जुटे । जंतर मंतर पर कॉकरोचों का आन्दोलन आप के लिए यह पागल और प्रौपैगैंडा फैलाने वाले हो सकते हैं लेकिन जो दोपहर की तपती धूप सहते हुए रातभर डटे हुए हैं । वह केवल इस देश की संवैधानिक हको के लिए डटे हैं !

अंधेरा किया, पानी रोका, खाना रोका… पर छात्रों का हौसला नहीं रोक पाए! जंतर-मंतर पर नीट एग्जाम स्कैम के विरोध में बैठे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के साथ छात्रों को रोकने की हर संभव कोशिश की । लाइट्स और बुनियादी सुविधाएं बंद की गई । यह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, हमारे भविष्य को बचाने की जंग है। हम झुकेंगे नहीं! यह जंतर मंतर पर मौजूद हर नागरिक का तकियाकलाम नजर आ रहा है ।
“जिस काम को करिए दिल से करिए. यह भारत के युवा demographic dividend को चुनौती देता है। सकारात्मक रूप से, यह accountability की मांग मजबूत कर रहा है। सरकार को इसे सुनकर सुधार करना चाहिए (परीक्षा सुरक्षा, कोचिंग रेगुलेशन, रोजगार सृजन), वरना ऐसे आंदोलन बढ़ सकते हैं। अभी यह ट्रेलर लगता है — असली प्रभाव संगठन और निरंतरता पर निर्भर करेगा। शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन इसे रचनात्मक दिशा देना जरूरी है।
माना आन्दोलन में राजनीतिक महत्वाकांक्षा रही, दूसरी पार्टियों में ताक-झांक करने से भी परहेज़ रहा। वैचारिक पृष्ठभूमि के मामले में छात्र छात्र ही है । देश के लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह ज़रूरी है कि आप जिस दल में रहें, निष्ठा से रहें। हनुमानकूद करने वाले राजनीतिक लाभ तो पा लेते हैं लेकिन जनमानस में वे दो कौड़ी के रूप में गिने जाते हैं। कोई भी दल बुरा नहीं है। अच्छा और बुरा तो व्यक्ति होता है।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का जंतर मंतर आंदोलन एक युवा-केंद्रित, व्यंग्यात्मक लेकिन गंभीर विरोध प्रदर्शन है, जो मुख्य रूप से परीक्षा व्यवस्था की खामियों (खासकर NEET-UG 2026 पेपर लीक और CBSE OSM irregularities) के खिलाफ है। यह आंदोलन मई 2026 में शुरू हुआ, जब युवाओं को “कॉकरोच” कहकर अपमानित किया गया (संभवतः Supreme Court/High Court से जुड़े किसी विवाद या बेरोजगारी/परीक्षा तनाव के संदर्भ में)। Abhijeet Dipke इसके संस्थापक हैं। यह Gen-Z का पहला बड़ा सोशल मीडिया से सड़क तक का आंदोलन माना जा रहा है, जो व्यंग्य (satire) से शुरू होकर राजनीतिक मांगों तक पहुंचा।
NEET पेपर लीक (मई 2026 में परीक्षा रद्द हुई, CBI जांच, दोबारा परीक्षा), CBSE irregularities, छात्र आत्महत्याएं, और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता/जवाबदेही की कमी। यह बेरोजगारी, कोचिंग माफिया और सिस्टम फेल्योर का प्रतीक बन गया। सैकड़ों (कुछ रिपोर्ट्स में हजारों) युवा, छात्र, अभिभावक जुटे। रातभर धरना, खुले आसमान के नीचे सोना, क्रिकेट खेलना (दूसरे दिन) जैसी चीजें देखी गईं। Dipke ने दिल्ली पहुंचकर नेतृत्व किया।
लोगों ने थाली-चम्मच लाकर बजाए (कोविड काल के “थाली बजाओ” का व्यंग्य)। कॉकरोच मास्क, पोस्टर, झंडे। “Cockroaches” को resilient (टिकाऊ) प्रतीक बनाकर इस्तेमाल किया गया — “हम डरते नहीं, मरते नहीं”। अनुमति मिली (एक दिन की), लेकिन विस्तार पर विवाद। पानी/बिजली कटौती के आरोप लगे, Dipke ने PM/GHM पर सवाल उठाए। कुछ डिटेन हुए, लेकिन प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा।
हाथों में नारे और मांगें -मुख्य नारे (रिपोर्ट्स और वीडियो से) “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो!” “Leak in India”, “Cockroaches सुबह हो गई है, आ जाओ जंतर मंतर!” “हम कॉकरोच हैं, डरते नहीं!” शिक्षा सुधार, पेपर लीक रुकवाओ, छात्रों की भविष्य बचाओ संबंधी।
सरकार से मुख्य मांगें: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तुरंत इस्तीफा (7 दिन का अल्टीमेटम भी दिया गया)। परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, लीक रोकथाम, कोचिंग माफिया पर कार्रवाई। छात्र आत्महत्याओं पर ध्यान, शिक्षा व्यवस्था में सुधार। कुछ रिपोर्ट्स में व्यापक जवाबदेही (accountability) की मांग।
आंदोलन में मुख्यत शिक्षा फोकस्ड रहा, लेकिन कुछ अन्य सामाजिक मुद्दे (ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट आदि) भी जुड़े, जिससे फोकस डाइल्यूट होने के आरोप लगे। भारत के भविष्य पर विश्लेषण (विभिन्न दृष्टिकोण)यह आंदोलन युवा असंतोष का दर्पण है। भारत की आबादी का बड़ा हिस्सा युवा है, लेकिन बेरोजगारी, महंगी शिक्षा और परीक्षा तनाव उन्हें निराश कर रहा है।
Gen-Z सोशल मीडिया से सड़क तक आ रहा है। व्यंग्य से शुरू होकर संगठित विरोध लोकतंत्र को मजबूत कर सकता है। अगर यह निरंतर और शांतिपूर्ण रहा, तो शिक्षा सुधार (NT A/CBSE में पारदर्शिता, डिजिटल सुरक्षा) हो सकता है। भविष्य में युवा-केंद्रित नीतियां (रोजगार, मानसिक स्वास्थ्य) पर दबाव बढ़ेगा। “कॉकरोच” प्रतीक resilience दिखाता है — युवा सिस्टम की खामियों के बावजूद टिकेंगे और बदलाव लाएंगे।
व्यावहारिक/आलोचनात्मक दृष्टिकोण: आंदोलन अभी छोटा/प्रतीकात्मक है। बिना दीर्घकालिक संगठन, वैचारिक स्पष्टता और व्यापक गठबंधन के यह fade out हो सकता है। फोकस बिखरने (अन्य मुद्दे जुड़ने) का खतरा। सरकार इसे “anti-national” या “opposition-backed” बताकर dismiss कर सकती है। लेकिन यह सिस्टम की vulnerabilities उजागर करता है — अगर अनदेखा किया गया तो युवा alienation बढ़ेगा, जो सामाजिक अस्थिरता पैदा कर सकता है।
नकारात्मक/चिंताजनक दृष्टिकोण: राजनीतिकरण या बाहरी तत्वों के घुसपैठ से मूल शिक्षा मुद्दा dilute हो सकता है। पुलिस-प्रशासन टकराव बढ़ सकता है। लंबे समय में, अगर सुधार न हुए तो छात्रों में hopelessness बढ़ेगा, brain drain, कम उत्पादकता और सामाजिक तनाव। “Cockroach” जैसा self-deprecating humor मजबूत है, लेकिन sustainable politics के लिए vision चाहिए।
जंतर मंतर में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेने के लिए कॉकरोचों की आज ज़बरदस्त भीड़ एकत्रित हुई है। धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही पड़ेगा। हम कॉकरोच है हम कहीं भी लेट जाएँगे, आपने अब कोई चारा ही नहीं छोड़ा। इस्तीफ़ा तो करवा के रहेंगे हम कॉक्रोचेस! देश के युवा की आवाज सुनाई दे रही हैं?
आधी रात जंतर मंतर छात्रों का हुंकार । पूरा दिन और फिर पूरी रात जंतर मंतर पर Gen Z का आंदोलन चलता रहा है । रविवार को भी चलेगा । लगता है मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा लेकर ही दम लेंगे । केंद्र सरकार को इनसे बातचीत करनी चाहिए, GenZ की बात सुननी चाहिए । दिन भर की भीषण गर्मी और उमस में पूरे दिन बैठना, फिर भी रात तक पूरा जोश बरकरार है ।
कर लो जितना सितम पर हम नहीं डिगेंगे । “अंधेरा किया, पानी रोका, खाना रोका… पर छात्रों का हौसला नहीं रोक पाए!
जंतर-मंतर पर नीट एग्जाम स्कैम के विरोध में बैठे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के साथियों और अभिजीत को रोकने की हर संभव कोशिश की गई।
रात में लाइट्स और बुनियादी सुविधाएं बंद रहीं। आखिरकार खाने-पीने की व्यवस्था की गई । यह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, हमारे भविष्य को बचाने की जंग है। हम झुकेंगे नहीं! मतलब साफ है कॉकरोचों ने किया कमाल, जंतर मंतर पर डाला डेरा, सरकार पेसोपेस में, आप ट्विटर पर देशभक्त बनिए, कॉकरोच, सड़कों पर रहेगा।
